बजट खर्च, पर नहीं हुआ काम – बुन्देलखण्ड पानी के लिए तरसा

01-05-14 Kshetriya - Mahoba Handpump for webबुन्देलखण्ड। राष्टीªय ग्रामीण पेयजल मिशन योजना के तहत 2013-2014 में जल निगम विभाग साढ़े दस करोड़ की रकम तो खर्च हो गई लेकिन जिले में काम पूरा नहीं हुआ है। गांवों में हैण्डपम्प की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
सपा सरकार के बुन्देलखण्ड पैकेज के तहत उत्तर प्रदेश जल निगम ने जल निगम बांदा को नए हैण्डपम्प लगवाने व पुराने हैण्डपम्प का रीबोर करने के लिए 10 करोड़ 51 लाख 78 हज़ार रुपए दिए थे। इसमें लगभग पंद्रह सौ नए हैण्डपम्प और उन्नीस सौ पुराने हैण्डपम्प को रीबोर कराना था।
जिला बांदा ब्लाक तिन्दवारी। पलरा गांव के मेन चैराहे का हैण्डपम्प दो साल से रीबोर के लिए पड़ा है।
जिला बांदा, ब्लाक बबेरू। धौसड़ अलिहा और बबेरू सब्जी मण्डी के हैण्डपम्प रीबोर करने के लिए पड़े है। बीरगढ़, भवानीपुर और कोर्रम गांवों में नए हैण्डपम्पों की मांग अब भी है।
जिला महोबा, ब्लाक चरखारी। यहां रैनपुर चैराहे और जयेंद्र नगर दोनों के हैण्डपम्प लंबे समय से खराब पड़े हैं।
बांदा जल निगम के अधिषासी अभियन्ता ई. गिरीश कुमार का कहना है कि दूसरी किश्त का पैसा अभी मिला है तो बाकी काम करवाया जा रहा है। पर गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और सरकारी काम की इस देरी की भरपाई अब जनता कर रही है।

बांदा में 470, चित्रकूट में 210, महोबा में 311 और हमीरपुर में 275 नए हैण्डपम्प लगवाए जाने थे। सरकारी कागज़ों में बांदा में चैबीस, चित्रकूट में दो सौ दस, महोबा में आठ और हमीरपुर में हैण्डपम्प लगाए गए हैं।
बांदा में 935, चित्रकूट में 305, महोबा में 526 हमीरपुर में 350 हैण्डपम्पों का रिबोरहोना था। जिसमें बांदा में 285 चित्रकूट में 67 महोबा में 128 और हमीरपुर में 20 हैण्डपम्प की रीबोरिंग हुई है।