बच्चों का खाना खा रहे जानवर

Aanganvadi
आंगनवाड़ी में नहीं पोषाहार मिलता

जिला वाराणसी, ब्लाक चोलापुर, गांव रौनाखुर्द, गरथौली, चैबेपुर, रूपापुर और बर्थरा। इन गांवों  में आंगनवाड़ी के तहत पोषाहार और पका खाना कहीं मिलता है तो कहीं नहीं मिलता है। जो पोषाहार दिया जाता है वो ना के बराबर होता है। जैसे ऊंट के मुंह में जीरा।
गरथौली गांव के कलावती, सीमा, शीला इन सभी का कहना है कि गर्भवती महिलाओं और हमारे बच्चों को कभी सेतुआ तो कभी दोपहर का खाना नहीं मिलता है। कुछ गर्भवती महिलाओं को एक मुठ्ठी सेतुआ और बच्चों को बिस्कुट, नमकीन और लायी मिल जाती है। रौनाखुर्द गांव की शिवकुमारी ने बताया कि बच्चों को कभी-कभार ही दोपहर का खाना सेंटर से मिलता है। इसी तरह से बर्थरा गांव की कंचन ने बताया कि जो पोषाहार बच्चों के लिए आता है उसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पशुओं को बेच देती हैं। गांव रुपापुर की लालमनि ने भी यही शिकायत की।
चैबेपुर, गरथौली, बरसरा की सहायिका लालमनी, शिवकुमारी, राजकुमारी का कहना है कि हम लोगों को जितना मिलता है उतना   बांट  देते हैं। हमारे पास र्तो इंधन और बर्तन ही नहीं हैं तो हम खाना कहां से बनवाएंगे। बाल विकास अधिकारी और सुपरवाइजर हर महीने चोलापुर ब्लाक पर मीटिंग करवाकर पैसा मांगते हैं। कभी भी  जांच  करने के लिए नहीं आते हैं। कभी आएंगे भी तो सेन्टर बन्द होने के बाद। बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर मीना सिंह का कहना है कि आंगनवाड़ी सेन्टरों पर खाना बनाने के लिए सरकार की तरफ से आदेष तो आ गया लेकिन ईंधन और बर्तन के लिए कोई बजट नहीं है। हम लोग मीटिंग में इस बात को उठाते हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है।