बचपन में खेल अब कमाई का ज़रिया

karvi
विजइया को बैलगाड़ी बनाने में आता है मज़ा

जिला चित्रकूट। बचपन मे बच्चे तरह तरह के खिलौने बनाकर खेलते हैं। इसके लिए वह कहीं मिट्टी तो कहीं लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अगर यही खेल बड़े होकर आमदनी का ज़रिया बन जाए तो  क्या कहने हैं। कुछ ऐसा ही साठ साल के विजइया के साथ हुआ। ज़िला चित्रकूट के पहाडी ब्लाक के बक्टाबुजुर्ग गांव में रहने वाले विजइया ने बताया कि जब वह पांच साल का था तभी से लकड़ी के खिलौने बनाकर खेलना उसका सबसे पसंदीदा खेल था। लकड़ी का लढा यानी बैलगाड़ी बनाकर उसमें मिट्टी के पहिया बनाकर गांव के सारे बच्चों को इकट्ठा कर उससे खेलने में उसे बड़ा मज़ा आता था। जब यह गाड़ी टूट जाती तो वह फिर से नई गाड़ी बनाता था। विजइया ने बताया मैं जैसे जैसे बड़ा होता गया वैसे वैसे लकड़ी का सामान बनाना मेरे लिए खेल से एक काम में बदलता गया। क्योंकि काम मेरी पसंद का था इसलिए मैंने इसमें महारत हासिल करने के लिए हर कोशिश की। मेरे बनाए लकड़ी के सामान खासकर बैलगाड़ी मेरे गांव के लोग तो खरीदते ही हैं साथ ही आसपास के गांवों के लोग भी उसे खरीदने खूब आते हैं। मैं अपने काम में लगातार कुछ न कुछ नया सीखता रहता हूं।