बकरियों के लिए बाघ से लड़ने वाली लड़की

साभार: विकिपीडिया

21 साल की रुपाली मेश्राम एक दुबलीपतली सी ग्रामीण लड़की हैं। लेकिन ये दुबली सी दिखने वली ये लड़की बहुत बहादुर है। अपनी बकरियों को बचाने के लिए रुपाली सिर्फ एक लड़की के सहारे खूंखार बाघ से लड़ गई।
दरअसल, पूर्वी विदर्भ में भंडारा ज़िले के नागझिरा इलाक़े में वाइल्ड लाइफ़ सैंक्चुरी (वन्य जीव अभयारण्य) से सटे गाँव में रुपाली का छोटासा घर है। उसकी माँ जीजाबाई और बड़ा भाई वन विभाग के लिए दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं। परिवार ने बकरियाँ पाल रखी हैं ताकि कुछ और रुपए बच पाएं।
24 मार्च की रात जब बकरियों के चिल्लाने की आवाज़ें आईं तो नींद से उठकर रुपाली ने घर का दरवाज़ा खोल दिया। आंगन में बंधी बकरी ख़ून से लथपथ थी और उसके क़रीब हल्की रोशनी में बाघ की छाया रुपाली को नजर आई। तभी रुपाली ने एक लकड़ी उठाकर बाघ पर वार किया और लकड़ी की मार पड़ते ही बाघ ने उन पर धावा बोल दिया।
दोनों की हाथापाई में बाघ ने रुपाली पर गहरे वार किये थे। वहीँ रुपाली की चीखें सुन कर उसकी माँ भी वहां आई और उन्होंने भी बाघ पर लकड़ी से वार किया। तब बाघ ने उन्हें भी घायल कर दिया लेकिन इसी बीच वो दोनों घर के अन्दर गई और तब अचानक से रुपाली ने अपनी घायल माँ और अपने खून बहते चेहरे की सेल्फी ली।
एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार, रुपाली गंभीर रूप से घायल थीं और उन्हें लगा था कि शायद उनका अंतिम समय गया है इसलिए उन्होंने सेल्फी लेना सही समझा।
इसके बाद उन्होंने बाकी लोगों को भी फोन से आगाह किया और तब वन विभाग के एक कर्मचारी ने उन्हें हॉस्पिटल तक पहुँचाया और उनकी जान बचाई।
रुपाली बेहद बहादुर हैं और अब किसी बाघ से नहीं डरती। वो बस कोई अच्छी नौकरी करना चाहती हैं।

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