बइठ के बीतअला रात

kasba daniyalpurजिला वाराणसी, ब्लाक चिरईगांव, गांव दनियालपुर। इहां सड़क के किनारे रहे वाले दस घर के लोगन के पन्द्रह साल से रहे के कउनों सुविधा नाहीं हव। इहां के लोग पन्नी डाल डाल के अपने परिवार के लेके रहलन।
इहां के रहे वाली नाजमा, शहजादी, नुजाबेगम के कहब हव कि हमनी के पन्द्रह साल पहिले घर रहल। लेकिन गिर भहरा गयल आउर ए समय हमनी के रहे के कउनों ठेकान नाहीं हव। जब बरसात होला तो हमनी के बइठ बइठ के आउर जाड़ा में सिकुड़ के रहे के पड़अला। हमनी के पास पइसा ना हव कि हमनी घर बनवा लेई। पहिले बिनकारी चलत रहल तो कुछ कमाई हो जात रहल लेकिन अब उहो बन्द हो गयल। कइसो कइसो दिन में सौ पचास के काम हो जाला तो नमक रोटी के इन्तजाम हो जाला। हमनी कई बार प्रधान से कहे तो प्रधान कहलन कि दस हजार रूपइया देबअ तो पास होई। हमनी के पास एतना पइसा ना हव कि हमनी देई।
इहां के प्रधान फौजदार के कहब हव कि आवास खातिर सर्वे हो गयल हव। आउर सूची के आधार पे एक सौ अस्सी आवास के प्रस्ताव देहले हई। जेकर जेकर आई ओके देवा जाई।