प्रधानमंत्री मोदी के ‘गाय के नाम पर हत्याएं मंजूर नहीं’ बयान के बाद भी झारखंड में ड्राइवर की हत्या

साभार: डीडब्लू

स्वघोषित गो-रक्षकों द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में की जा रही हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गौ-भक्ति के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार नहीं की जा सकती।

29 जून को साबरमती आश्रम मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है।

साबरमती आश्रम की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा, “गौ-भक्ति के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार नहीं की जाएगी। महात्मा गांधी आज होते तो इसके खिलाफ होते।

मोदी ने कहा, “इस देश में किसी व्यक्ति को कानून को अपने हाथों में लेने का अधिकार नहीं है।

हालाँकि गोरक्षा के नाम पर हत्या करने वालों पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा।  29 जून को ही झारखंड के रामगढ़ में कथि‍त गोरक्षकों ने गोमांस ले जाने के शक में एक वैन ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या कर दी।  एक मारुति वैन से बड़ी मात्रा में मांस लेकर कुछ लोग चितरपुर से नई सराय जा रहे थे।  इस बीच रामगढ़ बाजार टांड के पास बजरंग दल और गोरक्षा समिति के लोगों ने इस गाड़ी को रोक कर मांस को सड़क पर फेंक दिया।

कथित गोरक्षकों ने गाड़ी को आग के हवाले कर दिया, वहीं ड्राइवर मोहम्मद असगर को बुरी तरह से पीटा, जिसने रांची के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया।  

बताते चले कि डाटा वेबसाइट इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2010 से 2017 के बीच गोवंश को लेकर हुई हिंसा में 57 प्रतिशत पीड़ित मुसलमान थे। इस दौरान गोवंश से जुड़ी हिंसा में मारे जाने वालों में 86 प्रतिशत मुसलमान थे। इन आठ सालों में ऐसी 63 घटनाएं हुई जिनमें 28 भारतीयों की जान चली गई। गोवंश से जुड़ी हिंसा के 97 प्रतिशत मामले केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद हुए हैं। इंडिया स्पेंड ने 25 जून 2017 तक के आंकड़ों के आधार पर ये विश्लेषण किया है।

गौरतलब है कि दिल्ली में 28 जून की शाम जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन किया गया, जिसमें बल्लभगढ़ निवासी मुसलमान युवक जुनैद खान सहित देश भर में भीड़ द्वारा जगह-जगह की जा रही हत्याओं के खिलाफ आवाज उठाई गई। नॉट इन माइ नेमशीर्षक से यह प्रदर्शन किया गया। इस विरोध में हजारों लोग शामिल हुए थे। इस विरोध प्रदर्शन के बाद ही प्रधानमंत्री ने अपना बयान दिया है।