‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के लाभ से अब भी महिलाएं वंचित

साभार: विकिपडिया

आरटीआई के माध्यम से खुलासा हुआ है कि ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के लाभ से अब भी तीन राज्य की महिलाएं वंचित है। पोषण, टीकाकरण और स्वच्छता ये तीन मापदंड पीएम मोदी ने जनता के सामने रखे थे जिसमें पहले मापदंड पर ही सरकार पूरी तरह से विफल दिख रही है।

‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के तहत अब तक कुल 20 लाख 99 हजार 975 महिलाओं को लाभ मिला है। यानि करीब 21 लाख महिलाओं को इसका लाभ मिला है।

बता दें कि 31 दिसंबर 2016 और2017 के नए वर्ष के आगाज के साथ ही पीएम मोदी ने गरीब गर्भवती महिलाओं को 6000 रूपये देने की घोषणा की थी।

वहीं 2017 से अब तक कुल 36 राज्यों में 204859.25 लाख रूपए जारी किए जा चुके है, लेकिन इस योजना का लाभ तीन राज्य कि महिलाओं को नहीं मिला है, जिसमें तमिलनाडू, मेघालय और नागालैंड शामिल है। जबकि ओडिशा में मात्र 7 महिलाओं को ही इस योजना का लाभ मिल पाया है। जिसका कारण केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की तालमेल की कमी बताई जा रही है।

महिला एंव बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि इस मुद्दे पर हमने राज्य सरकार से कई बार बात की मगर बात नहीं बन पाई जिसका खामियाजा इन तीन राज्यों की महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। इस लिहाज से ये योजना पूरे भारत में लागू हुई ऐसा नहीं कहा जा सकता है।

इस योजना के तहत गर्भवती महिला को तीन किस्तों में सहायता दी जाती है। जब महिलाएं आंगनवाड़ी केंद्र में अपनी गर्भावस्था पंजीकृत करती हैं तो पहली किश्त के रूप में उन्हें 1000 रूपये की सहायता प्रदान की जाती है।

प्रसव से पहले गर्भावस्था के 6 महीने बाद प्रयोगशाला में परीक्षण किए जाने पर 2000 रूपये महिला को दूसरी किश्त के रूप में दिए जाते हैं। डिलीवरी के बाद महिला को तीसरी किस्त प्रदान की जाती है लेकिन यह क़िस्त महिला को बच्चे के टीकाकरण (जैसे बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी, हेपेटाइटिस बी) के बाद ही दी जाती है।

मजदूरी या किसी अन्य नौकरी में काम करने वाली सभी महिलाओं को उन दिनों में छुट्टी लेनी पड़ती है, जिसके कारण उन्हें वही मजदूरी नहीं मिलती है। इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को उनकी मजदूरी मिल जाएगी। जिसके माध्यम से, वे स्वयं का ख्याल रखने में भी सक्षम होंगी और उन्हें पौष्टिक भोजन भी मिल सकेगा और वो स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकेंगी।

यह लाभ गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को पोषण के लिए दिया जाता है, ताकि उन्हें कुपोषण का शिकार होने से रोका जा सके।