प्रजामंडल पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा बना शराबबंदी

साभार: प्रजामंडल पार्टी/फेसबुक

उत्तराखंड राज्य में पहले से ही मौजूद कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की जमात में एक और क्षेत्रीय दल पिछले साल शामिल हो गया। नए राजनीतिक दल प्रजामंडल, हिमालय बचाओ आंदोलन संयोजक समीर रतूड़ी के नेतृत्व में और मलेथा के ग्रामीणों की मौजूदगी में श्रीनगर गढ़वाल में शुरू किया गया था।
यह पार्टी विधानसभा चुनाव में दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी श्रीनगर, पौड़ी, टिहरी, प्रतापनगर, देवप्रयाग, घनसाली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, केदारनाथ, यमकेश्वर समेत दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी का मुख्य नारा पहाड़वाद का होगा।
सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां की नीतियों में पहाड़ की पहचान निरंतर धूमिल होती जा रही है। इसीलिए क्षेत्रीय दल के रूप में आंदोलनकारी ताकतों को लेकर प्रजामंडल पार्टी का गठन किया गया है। पहाड़ के सभी आंदोलनों में महिलाओं की मुख्य भूमिका होती है, इसीलिए दल का नेतृत्व भी महिलाओं को दिया गया है।
पार्टी ने राज्य में पूर्ण रूप से शराबबंदी के साथ गांवों की मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष की बात कही है। इसके साथ पहाड़ों में बनने वाली जलविद्युत परियोजनाओं से प्रभावित होने वाली जनता को मुफ्त या रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी पार्टी ने की है।
साथ ही, पहाड़ में खेती करने वाले किसानों को मनरेगा के तहत मानदेय दिलाना और पहाड़ के स्थानीय संसाधनों के अनुरूप नौजवानों के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराना भी पार्टी की प्राथमिकताओं में है।
प्रजामंडल पार्टी का मुख्य उद्देश गांवों में शराब बंदी कराना है। जिसके लिए पार्टी द्वारा गांव-गांव में कॉकटेल पार्टी का विरोध हो रहा है। विधानसभा चुनाव में शराब बंदी पार्टी का मुख्य मुद्दा है।