पोषण पर सरकार का भारी बजट, लेकिन फिर भी यूपी कुपोषण में क्यों है आगे? देखिए हैदरगढ़ की स्टोरी

2030 तक देश मा हर तरह के कुपोषण से मुक्ति कै संकल्प नीति आयोग लेहे बाय लकिन आज देश कै हर तीसरा बच्चा कुपोषित बाय| कुपोषण कै ही एक मामला हैदरगढ़ मा सामने आय | यहि क्षेत्र मा आवै वाले ग्यारह मजरा कै कुल आबादी आठ हजार पांच सौ अठहत्तर बाय| यहि आबादी मा 35 गेदहरै अतिकुपोषित अहैं अउर चालिस कुपोषित अहैं|
सरिता अवस्थी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सराय चौबे बताइन कि जवन एनर्जी पूर्ण पोषाहार गेदहरन के ताई आवाथै वका हर बच्चा का पचास-पचास ग्राम दिया जाथै|
प्रीती सिंह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बीजापुर बताइन कि 0 से 5 साल तक कै तिरानबे गेदहरा अहैं जेहमा से सामान्य चौसठ, आंशिक चौबिस अउर कुपोषित पांच गेदहरा अहैं|
कुपोषण कै वजह देखा जाय तौ खानपान मा कमी के साथ मेहरारुन मा खून कै कमी भी एक वजह आय| देश मा 53 प्रतिशत से अधिक मेहरारू खून के कमी से पीड़ित अहैं|
राजवंती सहायिका सराय चौबे कै कहब बाय कि सरकार गेदहरन का खेलै के ताई गेंद, घोड़ा देहे बाय बाकी जउन जरुरत पराथै अपने तरफ से लावा जाथै|
सुधा रश्मि ए.एन.एम. हैदरगढ़ बताइन कि गेद्हरा दुबला-पतला कमजोर हाथ-पैर पेट निकला रहाथै जब खाना खाथै तौ पचाय नाय पावत| बहुत टट्टी कराथै| शरीर कै पूर्णरूप से विकास नाय हुवत| अति कुपोषित गेदहरन के ताई विटामिन ए कै सीरप मिला बाय| वका दिया जाथै समझावा जाथै की हप्ता मा दुई बार पिलावै| उम्र के अनुसार बीस-पचीस बूंद हप्ता मा दुई बार पिलावा जाथै|

रिपोर्टर- नसरीन

12/09/2017 को प्रकाशित