पैसा लगल सूची में नाम के

In_India_the_main_criticism_is_that-_Socialism_for_the_rich_and_capitalism_for_the_poorजिला वाराणसी, ब्लाक हरहुआ, गांव  भोहर। इहां के राजभर बस्ती में पन्द्रह घर के आबादी हव। केहु के राषनकार्ड बनल हव। केहु के राषन मिलला केहु के नाहीं मिलला। आउर जेकरे कार्ड नाहीं हव उ लोगन से राषनकार्ड बनवावे खातिर के दु हजार रूपिया लेवल गएल हव।
मुन्नी देवी पासु देव, भगवन्ता, मन्जू कौषल समेत कई लोग के कहब हव कि हमने के पास पीला कार्ड हव हमने के लाल कार्ड बनवावे खातिर के प्रधान हमने से दु हजार रूपिया लेलन। लगभग बीस लोग से पइसा लेले हयन। कहलन कि तु लोग के कार्ड बन जाई आउर राष्रन मिलि। हमने के तीन महीना राषन मिलल हव। मई महीना से जे आगे गएल हव ओके राषन मिल हव जे पीछे गएल हव ओसे कहलन कि राषन कम आएल रहल अब ना मिलि जा अगले महीने में मिलि। हमने अपने खाए के ना रखली कार्ड के लालच में पइसा दे देहली उ भी पानी में चल गएल।
प्रधान राजेष के कहब हव कि अइसन कउनो बात नाही हव। कार्ड खातिर के पइसा नाहीं लेहले हई जे हमार खास रहल ओकर नाम सुची में डलवइले हई। यही से गांव  वालन कहलन कि प्रधान पइसा लेहले हयन आउर चिन्ह के काम करलन।