पेंटर तो बहुत देखे होंगे लेकिन महोबा जिले के इस पेंटर जैसा कोई नहीं

रंगो की दुनिया, जहां हम एक अलग जिन्दगी का एहसास करते हैं। वो दुनिया जिसे हम रंगो की दुनिया कहते हैं। आइये चलते है एक ऐसी ही दुनिया में, जिसे बनातें हैं महोबा जिले के पेंटर नरेश कुमार विश्वकर्मा।
पेंटर नरेश कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि मुझे पेंटिंग विरासत में मिली है। मेरे पिताजी भी बचपन से पेंटिंग करते थे, इसलिए मेरे ऊपर भी इसका प्रभाव पड़ा है और दुसरे कलाकारों को देखकर कुछ ज्यादा ही प्रभाव पड़ा है, लेकिन पेंटिंग करना आसान नहीं है। महोबा के गृह मंत्री संस्थान में सत्रह साल से काम कर रहा हूं। महिला सशक्तिकरण, महिला हिंसा, पानी संरक्षण, भूमि संरक्षण और बच्चों के बारें में काम करता हूं। इंटर तक की पढ़ाई की है और आर्ट से डिप्लोमा किया है। पेंटिंग करना पहले तो शौक था अब काम बन गया है। मेरा सपना है कि सरकार का कोई काम चले तो हमें भी काम करने का मौका मिले। मुझे अभी तक राष्ट्रीय लेबल का पुरुस्कार नहीं मिला है।

रिपोर्टर- श्यामकली

Published on Mar 5, 2018