पुरुष के चरित्र पर सवाल

मुंबई की संस्था बीइंग एसोसिएशन के कलाकारों ने इसे बनाया है। इसकी लेखिका और रसिका अगाशे हैं। उनका कहना है कि पुरुष हमेशा से औरतों पर हिंसा करता रहा है। अलग अलग तरीके अपनाता रहा है। पर समाज हमेशा से पुरुष का ही साथ देता रहा है।
मुंबई की संस्था बीइंग एसोसिएशन के कलाकारों ने इसे बनाया है। इसकी लेखिका और रसिका अगाशे हैं। उनका कहना है कि पुरुष हमेशा से औरतों पर हिंसा करता रहा है। अलग अलग तरीके अपनाता रहा है। पर समाज हमेशा से पुरुष का ही साथ देता रहा है।

हिंदी पौराणिक ग्रंथ रामायण की नायिका सीता, खलनायिका शूर्पणखा और महाभारत युद्ध में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाली द्रौपदी के ज़रिए महिलाओं की हालत दिखाने वाले म्यूजि़यम आफ स्पीसीज़ इन डेंज़र नाम से बनाए गए नाटक का मंचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में किया गया। नाटक के चरित्रों के ज़रिए महिलाओं के खिलाफ सदियों से हो रही हिंसा के अलग अलग तरीकों को बताने की कोशिश की गई है। इसमें बताया गया है कि किस तरह से सीता के चरित्र पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें आग के हवाले कर दिया गया था। किस तरह द्रौपदी को उनकी सास कुंती ने बताया था कि पांचों पति को शारीरिक सुख यह ध्यान में रखते हुए देना है कि सबको बराबर हिस्सा मिले। जब द्रौपदी को पांडवो ने दांव पर लगाया तो किसी ने पतियों के चरित्र पर सवाल खड़े नहीं किए।
राम और पांडवों जैसे पुरुष महिलाओं के चरित्र का प्रमाण मांगते हैं। उन्हें जुए में हार जाते हैं। इस पर भी इतिहास इन्हें याद रखता है। नाटक के अंत में सभी नायिकाएं सवाल उठाती हैं कि क्या यह सारे पुरुष चरित्रवान थे?