पुरुषों की अनिच्छा और भारत में गर्भनिरोधक के कम उपयोग से हो रही है जनसंख्या वृद्धि

साभार: होअक्विन लोपेज़/फ्लिकर

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों से 2016 तक जनसंख्या में वृद्धि और गर्भनिरोधक के इस्तेमाल में 35% की गिरावट हुई है। जबकि गर्भपात और इमरजेंसी गोलियों की खपत दोगुनी हुई है। बता दें की ये दोनो ही स्वास्थ्य के लिए घातक हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2011 यानी एक दशक के दौरान राष्ट्रीय साक्षरता में 14% तक वृद्धि होने के बाद भी गरीब और अमीर बेहतर शिक्षित भारतीयों के लिए जन्म-नियंत्रण के हानिकारक उपाय, इमरजेंसी गोलियों और गर्भपात पहली पंसद बन रही है। जिसका परिणाम यह है कि भारत की जनसंख्या का अनुमान लगभग 132 करोड़ हो चूका है और अगले छह वर्षों में यह चीन की आबादी को पार कर वर्ष 2050 तक 170 करोड़ तक पहुंचने की संभावना दिखाता है। हालांकि, असुरक्षित गर्भपात से लाखों महिलाओं की मृत्यु भी होती है।
पिछले आठ वर्षों में गर्भनिरोधक के इस्तेमाल में 52% और पुरुष नसबंदी में 73% की गिरावट हुई है। ये आंकड़े निश्चित रुप से पुरुषों द्वारा गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने की अनिच्छा का संकेत देते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2008 और 2016 के बीच खाए जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों के उपयोग में 30% की गिरावट हुई है।
वर्ष 2008-09 में 300,000 पुरुषों के नसबंदी के लिए सहमति की तुलना में इसी अवधि के दौरान गर्भावस्था से बचने के लिए 55 लाख महिलाएं इन्ट्रयूटरिन कान्ट्रसेप्टिव डिवाइस (आईयूसीडी ) यानी अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक डिवाइस के उपयोग के लिए सहमत हुई हैं। इन वर्षों में इन उपकरणों के सहारा लिए महिलाओं की संख्या स्थिर बनी हुई है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, कर्नाटक की साक्षरता दर (75.6%) 74% के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। फिर भी, राज्य उन राज्यों में से है, जहां पुरुषों की नसबंदी, आईयूसीडी और गर्भनिरोधक गोलियों के उपयोग में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।
बिहार में, 73 % पुरुष साक्षरता दर (कुल 64%) के साथ, 2008 से 2016 के बीच गोलियों के इस्तेमाल में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। साथ ही इसी अवधि के दौरान कंडोम का इस्तेमाल दोगुना हुआ है। वहीं केरल में, जहां पुरुष साक्षर दर 96% है, कंडोम के इस्तेमाल में 42% की गिरावट हुई है।
असुरक्षित गर्भपात से मौत और विकलांगता को रोकने की दिशा में काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन, आईपास, के प्रशिक्षण टीम के सदस्य उमेश कुलकर्णी कहते हैं, “हालांकि भारतीय पुरुषों का मानना ​​है कि कंडोम यौन सुख को कम करता है और नसबंदी उनकी मर्दानगी को कम करती है, महिलाओं के लिए आईयूसीडी और गोलियों से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव भी चिंता के विषय हैं।”
एक दशक से वर्ष 2016 तक ,राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 का हिस्सा रहे 14 में से 10 राज्यों में प्रसव उम्र (15 से 49) की महिलाओं के बीच परिवार नियोजन के किसी भी आधुनिक विधि के उपयोग में 6% की गिरावट हुई है। हालांकि, जन्म नियंत्रण के तरीकों में जागरुकता और परिवार नियोजन सेवाओं में सुधार है।
गर्भनिरोधक के उपयोग में गिरावट क्यों हो रही है? कुलकर्णी का मानना ​​है कि इसके लिए सरकार का ‘जबरिया नजरिया’ जिम्मेदार हो सकता है।

फोटो और लेख साभार: इंडियास्पेंड