पीढियों से चला आ रहा काम, अवैध बुलाकर बंद कराना लाजिम है क्या?

जिला महोबा, शहर महोबा 11 मार्च को उत्तर प्रदेश में नइ सरकार आई जई के संगे नए नियम भी बनबो शुरू हो गये। चाहे बे एम् पी रोमियो की टीम हो या बूचर खाने बंद कराबे को फैसला। जे फैसलन से आम जनता पे का असर पर हे। जो आदमी पीढ़ीयन से बूचर खाने चला रए उन नो आगे को का रास्ता का हुए।
महोबा जिला में अठारह लायसेंसी बूचर खाने हे जिने शहर से दूर बने मास मंडी में जाने परे। आदमियन ने उते न जाबे के लाने नवम्बर में अनशन भी करो तो। केऊ छोटे दुकानदार भी हे जिनको तो धधो ही बंद हो गओ।
बुंदेलखंड में आदमी सूखा बाढ़ ओलेन के कारन आदमी पलायन या आत्महत्या करबे पे मजबूर हो जात। एसे में बूचर खाने को बंद कराबो एक और बेरोजगारी की लिस्ट में नाम जुड़ जेहे।
बंटी ने बताई के हमाओ तो जो धंधो जब हमाए ससुर हते तब से चलो आ रओ। पुलिस कह रई के लायसेंस देख हे फिर तीस के बाद निर्णय हुए। हम ओरन की उते अच्छे से ब्यवस्था हो जाए तो हम उते जाबे नइ तो हम इते रेहे और बूचर खानों उते।
मुहम्मद रज्ज्वाली ने बताई के हमाई तो चार छह पीढ़ी निकर गयी तब से हो रओ लायसेंस भी हे हम सब के पास लायसेंस हे। डॉक्टर पास करत नगर पालिका रसीद भी देत हमाओ तो नंबर एक को काम हे।
मोहम्मद शहजाद ने बताई के बाजार बनी नइया इतेई बिकत तो ग्राहक हे जो इतेइ जानत अगर उते जेहे तो हमाओ धंधो नइ चल पेहे। अगर बंद हो जेहे तो भूखे मर हे।
रन्नो ने बताई जो करत हे जो धंधो उने करन देबे कोऊ की रोजी रोटी न बंद करबे किते जेहे जे आदमी नइ तो सरकार कोई काम देबे। जुबैदा खातून ने बताई के हमाओ धंधो जोई हे हम और कछू कर नइ सकत का यू पी सरकान इन आदमियन के बारे में सोच हे।

रिपोर्टर- कविता और सुनीता प्रजापति

29/03/2017 को प्रकाशित