टी बी की जकड़ में बुंदेलखंड, कब और कैसे रुकेंगी मौतें?

मध्यप्रदेश, जिला छतरपुर, गांव नौगांव। यहां टीबी की बीमारी का मशहूर क्लीनिक डाक्टर चौहान की है यहां पर बहुत दूर दूर से लोग इलाज कराने आते है। 2016 में भारत में करीब चार लाख तेइस हजार मौतें टीबी से हुई हैं साथ ही चौसठ प्रतिशत मामले नये मरीजों के हैं। टीबी पर नियन्त्रण नहीं करनें की वजह गरीबी और टीबी की दवा का असर न होना है जिसके कारण अब नई डाट्स की दवा आई है। बांदा के गोपरा गांव में टीबी के मरीजों के हाल जस के तस है।
गोपरा के मरीज बाबादीन का कहना है कि छह महीने दवा कराने के बाद भी खांसी आती है। रामपाल ने बताया कि पहले जानकीकुंड में दवा कराया है बाद में नयागांव में दवा कराये है।
चित्रकूट के ब्यूर गांव के शिवकुमार का कहना है कि शरीर बचाना है तो पैसे की चिन्ता नहीं है। जगनी ने बताया कि पीढियों से चली आ रही टीबी की बीमारी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
नौगांव के मरीज घासीराम और निजाम अली ने बताया कि सरकारी अस्पताल में  भरोसा कम है इसलिये निजी अस्पतालों में दवा करा रहे है।
ललितपुर के काशीराम ने बताया कि तीन बार आने के बाद रूपये बहुत लगे है लेकिन अब आराम है। बांदा के सी.एम.ओ संतोष कुमार का कहना है कि नई डाट्स में मरीज के वजन के हिसाब से दवा दी जायेगी।
बाईलाइन-खबर लहरिया ब्यूरों
07/11/2017 को प्रकाशित

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