पिता के सपनें को किया साकार

जिला बांदा, ब्लाक बड़ोखर, गांव महोखर हम कतौ कतौ जउन करे का सोचित हैं वा काम आपन जिन्दगी मा नहीं कइ पाइत हन। यहै कारन आपन सपना आपन बच्चन का लइ के पूर करत हैं। या काम कइ देखाइन हैं प्रज्ञा नन्द वर्मा।
पतीस साल के प्रज्ञा नन्द वर्मा आपन तीन बच्चन का संगीत के शिक्षा दिहिन हैं जेहिमा बच्चन का बड़े बड़े ईनाम मिले हैं।
मोहिका बचपन से संगीत नीक लागत रहै गाना गावे का बहुतै सउख रहै, पै मोर आवाज नीक नहीं रहैं यहै कारन मैं गाना नही सीखेंव
तब मैं आपन बच्चा अंजली वर्मा, दीपिका वर्मा, अउर राहुल वर्मा का संगीत सिखाये हौं।
बेरोजगारी के बाद मास्टर के नौकरी मिली है तीस किलोमीटर दूरी तिंदवारी मा पढ़ावै जात हौं बच्चन का सिखावै मा बहुतै रुपिया लागत है यहै कारन कर्जा लेका पड़त है
बच्चन का सगीत सिखावत देख के मुहल्ला के मडई कहत हैं कि मंडली बनाये हैं इनतान कहिके उंई हमार मजाक उडावत हैं।
मडईन का जिन्दगी मा कुछौ ना कुछौ करत रहैं का चाही यहिसे देश अउर शहर का नाम होत हैं।
तेरह साल के अंजली वर्मा बतावत है कि सात साल के मोर बहिनी दीपिका वर्मा अउर ग्यारह साल का भाई है। हम तीनों मिल के एक साथ सगीत सिखित हन मनमोहन गुरु गीता मैडम उस्ताद सफीक खान से हम संगीत से सीखे हन।
गायकी खातिर मोहिका राज्यपाल पुरुस्कार भी मिल चुका है। हम जंहा गाना गावे जइत हन तो बहुतै इनाम मिलत है अपने बाप के कारन हम येत्ता नीक संगीत सीखे हन। हमे आगे बढावै उनकर पूर हाथ है। यहै कारन उनकर सपना पूर भा है।

रिपोर्टर- मीरा देवी 

26/09/2016 को प्रकाशित