पिछले एक साल में रैगिंग की 75 प्रतिशत घटनाएं बढ़ी

 

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार पिछले 5 साल यानि 2013 -17 के बीच देश में 3,022 शिकायतें रैगिंग की आई। रैगिंग की घटनाओं में ये बढ़ोत्तरी- 2013 में 640, 2016 में 515 और 2017 में 907 रैगिंग की शिकायतें आई। सबसे अधिक रैगिंग की घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुई, जहां 2013-17 के बीच 461 रैगिंग की शिकायतें आई थी, इनमें से 143 शिकायतें 2017 में दर्ज हुई। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश में 357, पश्चिम बंगाल में 337, ओडिशा में 207 और बिहार में 170 शिकायतें इन पांच सालों में दर्ज हुई।

 

रैगिंग के दुष्परिणामों के बावजूद भी ये खत्म नहीं हो पाई है। 1 जनवरी से 27 मार्च के बीच में 2,041 शिकायतें आई, जिनमें 871 शिकायतों में ही सजा हो पाई हैं। 338 मामलों में आरोपी छात्रों का निलंबन हुआ है। ये जानकरी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने लोकसभा में बताई।

रैगिंग की शिकायतों के साथ ही 36 प्रतिशत विद्यार्थियों ने माना कि रैगिंग उन्हें बाहरी दुनिया के लिए तैयार करने में मदद करती है। 33 प्रतिशत विद्यार्थी इसे मजे में लेते हैं, तो दूसरी तरफ 45 प्रतिशत विद्यार्थियों ने इसे शुरुआत में गलत पर बाद में सही तरीका माना। 36 प्रतिशत विद्यार्थियों ने इसे बाहरी दुनिया के अत्याचार का सामना करने का तरीका बताया। आपको बता दें कि 84 प्रतिशत विद्यार्थी रैगिंग की शिकायत ही नहीं करते हैं।   

साभार: अलका मनराल