पानी की मची मारा मारी

IMG_3421महोबा जिला में इत्ती बारिस होय के बाद भी पानी की बोहतई मारा मारी मची हे। जभे कि े ‘जल ही जीवन’ हे। पानी की समस्या दूर करे खें सरकार ने ग्यारह करोड़ रूपइया की लागत से ‘जल सोधन यन्त्र’ के तहत भेजो हे। जोन 2014 तक पूरो हो जेहें फिर भी उस बजट को अभे तक कोनऊ असर नई दिखात आय। महोबा जिला के गांवन में कहूं पाइप लाइन फटी हे तो कहु हैण्डपम्प बिगरे हें, तो कहूं हैण्डपम्प में पानी नई आउत हे। जीसे जनता पानी खे बोहतई परेशान रहत हे। गांव के बाहर दूर पानी लेय जात हें। गरीब जनता अपनी परेशानी से जूझत हे। प्रधान से आपन समस्या कहत हे तो प्रधान हां कह के टार देत हे। जनता समस्या ठीक होय को इन्तजार जनता करत रहत हे, पे कोनऊ ध्यान नई देत आय कि जनता पर का बीतत हे। ऊ केसे अपने परिवार ओर जानवरन की प्यास बुझावत हें। जभे सरकार ने इत्तो बजट भेजो हे तो ऊखो उपयोग काय नई होत आय? 2013 निकरे खे हे ओर 2014 आये वालो हे फिर भी पानी की कोनऊ सुविधा नइयां? ई बात को जवाब सरकार खे अपने सरकारी कर्मचारियन से लेंय खा चाही। का सरकार जोन इत्तो रूपइया भेजत हे तो नाम खे भेजत हे, या अधिकारियन के बीच में खत्म होय खा? का अधिकारियन को सरकारी वेतन से पूर नई परत हे, जीसे गरीब जनता की परेशानी दूर करें खे आओ रूपइया ऊ योजना तक नई पोहच पाउत हे। बीच में ही ऊ रूपइया खत्म हो जात हे।