जब पात्रों को देना ही नहीं है, तो क्यों बनी है कालोनी, महोबा जिले की कहानी

जिला महोबा, शहर महोबा जब पात्रन को देने ही नइया तो काय बनी जे कालोनी जिते करोड़न रुपइया की संख्या में कालोनी बनी। एक सौ चौरासी लेकिन आज तक आदमियन को रेबे के लाने नइ दई गयी। चाहे जो सरकार आ जाए लेकिन गरीबन को कोनऊ लाभ नइ मिलत।जिला महोबा, शहर महोबा जब पात्रन को देने ही नइया तो काय बनी जे कालोनी जिते करोड़न रुपइया की संख्या में कालोनी बनी। एक सौ चौरासी लेकिन आज तक आदमियन को रेबे के लाने नइ दई गयी। चाहे जो सरकार आ जाए लेकिन गरीबन को कोनऊ लाभ नइ मिलत। रज्जू श्री वास ने बताई के जा कालोनी को बने पंद्रह साल हो गयी। दो सरकार बन गयी अब जनता जाय तो जाय किते। किराय से रत अब मकान मालिक बोल रए के खाली करो। अब मजबूरी में खाली करने परे नइ तो लाते और जूता खाने पर हे। गजाला ने बताई के हम किराय से रे रए कच्चे मकान में ढेड़ सौ रुपइया किराओ लगत। अगर कालोनी मिल जाबे तो सुविधा हो जेहे। हम ओरे बई में अपनों कछू धंधो कर ले तनक मनक। नूरजहाँ और पार्वती ने बताई के सब को मिली लेकिन हमे नइ मिली कालोनी। अगर काम आ जात तो बना खा लेत नइ तो भूखे बैठे रत जई झुपड़िया में चाह गर्मी होबे चाह ठन्डे और चाह बरसात होबे। अबरार एफ डी डूडा विभाग ने बताई एक सौ चौरासी आवास हे जीमे एक सौ बामुन आदमी पात्र हे। अबे जिला महोदय अधिकारी द्वारा पंद्रह जून तक दुबारा प्रार्थना पात्र मांगे गये ते। सी एल शेख वरिष्ठ बाबू ने बताई एक सौ बामुन आदमियन  की सूची तैयार हे चस्पा भी हो गओ कोनऊ आपत्ति नइ आई। एक मई को आमंकन की तारीख लगी ती  लेकिन डी एम् सहाब ने पंद्रह दिन और बढ़ा दए।

रिपोर्टर- श्यामकली

Published on Jul 6, 2017