पहिले पाला, बाद मा बरसात, कइसे होई अनाज

taza banda fasal mein palaजिला बांदा। जनवरी अउर फरवरी 2013 किसानन खातिर मुसीबत का पहाड़ बन गा। जनवरी मा पाला अउर फरवरी मा जोरदार बरसात पूरी फसल का चउपट कई दिहिस। हर किसान के मुंह से यहै सुनैं का मिलत हैं या साल कसत जियब।
तिन्दवारी ब्लाक के पैलानी गांव के कैलाश, राजा भइया अउर नरैनी ब्लाक के गोबरी गोडरामपुर के साधूराम, सूरज, हीरा लाल समेत सैकड़न किसान इनतान से आपन बीती बतावत हैं। पहिले भगवान पाला डार के अरहरी के फसल चउपट कई दिहिस। अब 11 फरवरी से 16 फरवरी तक लगातार बरसात से चना, अलसी ,सरसों, गेहूं अउर मसुरी के फसल बरबाद होइगे है। अगर गेहूं चना भी न होई तौ कसत बच्चन का पेट भरब। जिनके नौकरी अउर धन्धा है उंई तौ मंहगा से मंहगा अनाज खरीद के खा लेहैं, पै हम कसत जियब। हमरे तौ खेती ही सब कुछ है।
बांदा जिला के ब्लाक बबेरू अउर बड़ोखर खुर्द ब्लाक के किसान भी यहै समस्या से जूझत हैं। बबेरू के ब्यौंजा गांव का रहंै वाला रमेश कहिस कि छह बिगहा मा अरहरी बोई रहै। पाला अउर पानी मा सबै सूख गे है। यहैतान बसंत लाल के नौ बिगहा, सत्यनारायन के सात बिगहा अउर राम सजीवन के ढ़ाई बिगहा खेती सूख गे है। सब आपन-आपन सूखी फसल लइके सरकार से मुआवजा के मांग करिन हंै।
एस.डी.एम. गिरीश कुमार शर्मा का कहब है कि 18 फरवरी 2013 का मीटिंग कीन है कि पाला अउर बरसात से चउपट फसल का मुआवजा दीन जई। गांव मा लेखपाल सर्वे करी। फसल के हिसाब से उनका मुआवजा दीन जई। चार पांच दिन मा सर्वे शुरू होई जई।