पहिले जागरूकता जरूरी

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बन्द भेल दरवाजा

आय दिन बिमारी से लोग हमेशा ग्रसीत हई। खास कर बच्चा के साथ कुछ न कुछ हमेषा होईते रहई छई। जेकर मेन कारण हई हवा, पानी के दूशित होनाई। जेई के रोक थाम के लेल सरकार हमेशा दवा वितरण अउर छिड़काव करई छथिन। लेकिन अभी भी समाज में देखे के मिलई छई कि कुछ लोग छिड़काव न करई छथिन अउर कुछ लोग मना कर देई छथिन।
जेईसे सीतामढ़ी जिला के बथनाहा प्रखण्ड के कोईली गोट के कुछ लोग कहई छथिन कि कुछ लोग डी.डी.टी. के छिड़काव करे पर उरीस फरई छई। जेई कारण मना करई छथिन। सरकार त अपना तरफ से बहुत प्रयास करई छथिन कि बिमारी दूर होये। हमेषा गांव में स्वास्थ्य के लेके सर्वे करई छथिन। दवा वितरण करवई छथिन। जेई गांव में कालाजर के लोग पायल जाई छई, ओई गांव में दु बेर, चार बेर डी.डी.टी. के छिड़काव करे के आदेष देई छथिन।लेकिन अभियाने चलावे से कोन फायदा? जहां लोग जागरूके न छथिन। पहिले सरकार लोग सब के डी.डी.टी. के बारे में जानकारी के लेल प्रषिक्षण, बैठक करबइतियथिन त षायद सब लोग इ महत्व के समझ पतियई अउर सुविधा के लाभ लेतियई। डी.डी.टी. छिड़काव करावे से कालाजर, डायरिया, मलेरिया आदि बिमारी न होई छई। ऐई के लेल अभियान चलावे से ज्यादा जरूरी जागरूकता हई। जब तक लोग में जारूकता न अतई तब तक लोग न समझ पईथिन। कुछ लोग अभी छथिन कि जान बुझके भी अन्जान समझई छथिन। सब लोग जनई छथिन कि अस्सी प्रतिशत बिमारी के जड़ हई गंदगी।