पलायननामा: घर छूटा, छूटा गाँव – क्यों पहली बार पकड़ा शहर का रास्ता?

जिला महोबा। पहाड़ों से घिरा है यहां का कबरई कस्बा। हजारों लोग  यहां खदानों में काम करते थे लेकिन मशीनीकरण ने मजदूरों से इनका काम छीन लिया।बढ़ती बेरोजगारी ने  हजारों लोग को इस कस्बे से पलायन करने को मजबूर किया है।  रचपाल इनमें से एक है।खदान का काम बंद हो जाने से रचपाल ने मिस्त्री का काम शुरू कर दिया लेकिन बालू अउर मोरम न मिलने के कारण यह काम भी बंद हो गया। मजबूर रचपाल जयपुर जा रहा है। रचपाल का परिवार पीढ़ियों से इस गांव में रह रहा है।  उनका  बचपन उनकी जवानी सब कुछ इसी गांव में बीता है।अपनी यादें समेटें पूरा परिवार परदेश जा रहा हैं। रचपाल का कहना है कि गांव के लोग परदेश जा रहें हैं वहां ईटा पाथने का काम होता है। एक साल से काम नहीं लगा है कर्जा लेकर खाना पड़ता है इस लिए बाहर जा रहें हैं। रचपाल की पत्नी सुनीता ने बताया कि मुसीबत के कारण पहली बार परदेश जा रहें हैं।
01/11/2017 को प्रकाशित
बाइलाइन-सुनीता प्रजापति

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