परिवार बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दोनों की पर नसबंदी सिर्फ महिला की क्यों? देखें चित्रकूट से ये खबर

भारत एक अरब इक्कीस करोड़ जनसंख्या वाला देश आय। यहिनतान भारत के जनसंख्या तेजी से बढ़त रहि तौ 2024 तक चीन देश से ज्यादा हमार देश के जनसंख्या होइ जई। जनसंख्या बढ़े से रोके खातिर ज्यादा जनसंख्या एक सौ पैंतालिस जिलन मा परिवार नियोजन योजना मा खास ध्यान दे का पड़ी। जिला चित्रकूट के रामनगर अउर कर्वी ब्लाक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मा नसबंदी शिविर लगायें गें हवै,जेहिमा मेहरिया बस देखाई पड़ती हवैं।
आशा कार्यकर्ता चुनकी बताइस कि मनसवा नसबंदी खातिर तैयार नहीं होत आहीं, कहत हवैं कि परिवार का, को कमा के खवई। कौशल पाण्डेय का कहब हवै कि नसबंदी मेहरिया मनसवा का न करावा चाही दूसर उपाय करा चाही। मनसवा नसबंदी करा सकत हवैं। संजय करवरिया का कहब हवै कि मोर मेहरिया नहीं चाहत कि मैं नसबंदी करालेंव, पै मैं नसबंदी कराइहौं।सविता बताइस कि मोर मनसवा नसबंदी करावै का मना कइ दिहिस तौ मैं नसबंदी करावैं आई हौं।
रुकमनिया बताइस कि मोरे चार बच्चा हवै यहै कारन मैं आपरेशन करावैं आई हौं। रुकमनिया का मनसवा बताइस कि मैं किसानी का काम करतहौ यहै कारन आपरेशन नहीं करावत आहूं। आशा कार्यकर्ता गीता बताइस कि मैं तीन मेहरियन का लइके आई हौं मनसवा आपरेशन खातिर तैयार नहीं होत आहीं।
सी एम ओ डाक्टर रामजी पाण्डेय का कहब हवै कि मेहरिया मनसवा दूनौ के नसबंदी करै के व्यवस्था हवै। मनसवा के नसबंदी बिना चीरा लगाये कीन जात हवै। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015 -16 के आंकड़ा देखे पता लागत हवै कि चौंतिस प्रतिशत मेहरियन मा एक प्रतिशत मनसवा नसबंदी कराइन हवै। 2013-14 के आंकड़ा मा दुई प्रतिशत मनसवा नसबंदी कराइन रहै।
रिपोर्टर-नाजनी और सहोद्रा  

Published on Dec 12, 2017