न्याय नहीं मिला तो आत्मदाह करेंगे, बाँदा जिले के मुरवां गाँव में चकबंदी में हुआ विवाद

‘सरकार हमार सुनवाई न करी तौ आगी लगाके आपन जान दइ देहूं’ या कहब आय बांदा जिला, ब्लाक महुंवा के मुरवा गांव का रहै वाले किसान ओंकार निरंजन का। वहिकर आरोप है कि चकबंदी गलत तरीका से कीन गे हैं हमार नींक जमीन के जघा खराब जमीन दइ दीन गें है। कोर्ट मा मुकदमा भी चलत है।या जमीन मा धान के फसल भी लगाये रहेहौं पै विपक्षी चन्द्रिकाप्रसाद पूर फसल काट लइगा है। यहै कारन मुख्यमंत्री से नियाव के गोहार लगायें हौं।
ओंकार निरंजन का लड़का कृष्ण कुमार बताइस कि चकबंदी जुलाई 2017 मा भा  रहै। वहिके बाद जउन जमीन मिली रहै तौ वहिमा धन के फसल बो दीन गें रहै।डी एम हमरे पक्ष मा फैसला करिन रहै अउर फसल काटे का कहिन रहै। पै एसडीएम अउर एसओ हमें फसल काटे से रोके रहै अउर विपक्षी फसल काट लइ गें हैं। हम दौड़त रहि गयेन हमार कुछौ सुनवाई नहीं भे आय।
विपक्षी रचना का कहब है कि जबै चकबंदी कीन गें रहै तौ आठ बीघा खेत दूसर जघा दीन गें रहै। हुंवा भी हमार पांच बीधा खेत रहै। तबै हम फसल काटे हन। ओंकार निरंजन का दूसर जघा खेत दीन गें हैं।
लेखपाल रामप्रसाद का कहब है कि तहसीलदार आदेश दिहिस रहै कि जउन पात्र मड़ई है उनका फसल काटे दीन जायें। सबै मड़ई चन्द्रिकाप्रसाद के पक्ष मा बोले है तौ फसल वहिका काटे दीन गें है।

रिपोर्टर- गीता

Uploaded on Jan 5, 2018