नोटबंदी राष्ट्रहित में है, तो इसकी तैयारी ग्रामीणवासियों के लिए क्यों नहीं?

बांदा जिला, ब्लाक महुवा, गांव डिंगवाही खुरहंड नोट बंद कर का फैसला सरकार राष्टहित का ध्यान मा रखा के करिन है। तौ यहि के तैयारी ग्रामीण बैंक मा नहीं कीन गे। यहै कारन गांव के मड़ई रुपिया निकले अउर बदलाये के लाने बहुतै परेशान हैं।
स्योढ़ा गांव के शाखा डाकपाल रमेश दत्त मिश्रा खुले का कहब है कि निकालै अउर बदलाये खातिर मड़ई आवत है पै हेंया रुपिया नहीं रहता है नोट बदल के देव तो बहुत दूरी के बात आये जेहिको खाता भी हेंया खुले है तो उनका भी रुपिया नहीं मिलत आय।
इलाहाबाद बैंक शाखा डिंगवाही के इन्द्रजीत सिंह बताइन सुबेरे सात बजे से मड़ई लाइन लगा के खड़े होई जात है। पै बैंक मा कैश न होय के कारन वापस लउटा जात है। स्टाप और व्यवस्था के कमी है बीमा पेंशन करसे समेत सबै समाज सेवा के काम बैंक मा होत है।
पुराने स्टाफ काम करत है नये लड़का जउन नौकरी करत है पुरान स्टाप काम करत है नये लड़का जउन नोकरी करत है उए दूसर अच्छी नौकरी मिले मा या नौकरी छोड़ के चले जात है। काहे से उनका पेंशन नहीं मिलत है सुरक्षा अउर गावं मा आये जाये का बहुतै परेशानी होती है या कारन भी नये लड़का नौकरी छोड़ के नये जात है।
खुरहण्ड के पोस्ट मास्टर रामबाबू का कहत है कि उपडाक के 11 ब्रांच जुड़े है जेहिमा हेंया 20 से 30 हजार तक का कैश भेजा जात है। हम दुई लाख के मांग के करित हन पै येत्ता कैश नहीं भेजा जात मड़इन का लउटे का पड़त है।

रिपोर्टर- मीरा देवी

Published on Nov 25, 2016