नोटबंदी के कारण पर्यटन क्षेत्र में भी लाखों का नुकसान

साभार: मुक्ता पाटिल/इंडियास्पेंड

उत्तरी गोवा के राजू लखानी का सबसे लोकप्रिय चंद्रमा सितारा रेस्तरां साल के इस समय तक पूरी तरह से भरा हुआ होता है। लेकिन इस बार नोटबंदी के चलते ये खाली पड़ा है। उन्होंने कहा, “हमारे पास कोई ग्राहक नहीं है, नोटबंदी के कारण पर्यटकों का आना 90% तक कम हो गया है।”
लखानी ने कहा कि अब श्रमिकों की छंटनी करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है। वह गोवा के कई रेस्तरां के मालिक हैं और उन्हें 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाने से 86% तक व्यापारिक नुकसान हुआ है।
विश्व व्यापार और पर्यटन परिषद (WTTC) द्वारा एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यात्रा और पर्यटन के क्षेत्र में पिछले साल 2।8% की तेज़ी देखने को मिली थी जो दुनिया के पर्यटन उद्धयोग में 2।3% की वृद्धि करती है। यह पर्यटन देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 6।3% का योगदान देता है।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पर्यटन भी एक श्रम प्रधान क्षेत्र है। इसमें 78 नौकरियों के लिए करोड़ रुपये का निवेश किया जाता है। जबकि, कृषि क्षेत्र में 45 नौकरियों के लिए भी निवेश और विनिर्माण किया जाता है।
कभी 2009 के बाद से, रोजगार में पर्यटन की हिस्सेदारी 500 लाख श्रमिकों पर लगातार 10% से अधिक रही है। इसका मतलब यह है कि यह क्षेत्र लगभग 50 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है जो कोलम्बिया की आबादी के बराबर है।
पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2015 में, भारत की यात्रा पर विदेशी पर्यटकों की संख्या 8 लाख से अधिक थी। जिससे 1.35 लाख करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई। यह 2014 में प्राप्त आय से ज्यादा रही। नोटबंदी के बाद लगातार विदेशी पर्यटकों को तकलीफों का सामना करना पड़ा जिसकी वजह से केरल और कर्नाटक में तेजी से बुकिंग गिर गयीं।
नवंबर, दिसंबर और जनवरी का महीना अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के भारत आने का सीजन होता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बुकिंग में भी इस बात तेज गिरावट आई है। बुकिंग कम होने से होटलों ने अपना रूम रेट कम कर दिया है और विमानन कंपनियों ने अपने टिकट पिछले साल के इसी सीजन की तुलना में 30 से 35 फीसदी तक सस्ते कर दिए हैं।

साभार: इंडियास्पेंड