नोटबंदी, एक साल बाद – कहाँ गया काला धन? सुनें चित्रकूट, बाँदा और महोबा की दास्तान

जिला चित्रकूट, बांदा और महोबा। नोटबन्दी के एक साल बाद 8 नवम्बर 2017  को हमने काले धन का सफर जानना चाहा? काला धन कहां गया अब आगे क्या होगा?
चित्रकूट के मानिकपुर के लाला राम गुप्ता का कहना है कि नोटबन्दी में गरीबों के रूपये निकले है। अमीरों के रूपये नहीं निकले हैं। दो हजार रूपये  के लिए गरीब लाइन में खड़ा था और अमीर लोग बोरा भर भर के पैसे निकाल रहे थे। वो भी बिना लाइन में लगे। कुन्नु लाला ने बताया कि मोदी कह रहा था कि पन्द्रह पन्द्रह लाख रूपये मिलेगें परन्तु हमें तो एक रूपये भी नहीं मिले हैं।
वकील नीरू गुप्ता का कहना है कि काला धन वापस नहीं आया है विदेशों में जमा काला धन वापस नहीं आया है। जरूरी समय के लिए जो रूपये रखे थे उसकों काला धन नहीं कहेंगे।
बांदा की जैतुनिया ने बताया कि नोटबन्दी में हमारे पूरे रूपये जमा हो गये थे अब रूपये निकालने में बहुत परेशानी होती है।
गीता का कहना है कि अब हमें इस सरकार को नहीं जिताना चाहिए।
महोबा के दूकानदार सुरेश कुमार का कहना है कि पहले पांच हजार की बिक्री होती थी अब एक हजार की होती है। सूखा नोटबन्दी के बाद जीएसटी लग गई। हमें समझ में नहीं आया कि इससे क्या फायदा हुआ है।

बाईलाइन-खबर लहरिया ब्यूरों

Published on Nov 7, 2017