नोटबंदी, एक साल बाद: अनीशा का परिवार तब भी था लाइन में, अब भी है लाइन में

जिला बांदा, ब्लाक नरैनी, गांव नसैनी। नोटबन्दी आई अउर चली गें। पै अनीशा के परिवार खातिर यहिकर दुःख हमेशा रहि काहे से परिवार का आरोप है कि नोटबन्दी के कारन के अनीशा मउत 29 नवम्बर 2016 का होइगे रहै। तबै समाजवादी पार्टी दुइ दुइ लाख का मुआवजा दें का कहिन रहै पै अनीशा के परिवार वाले अबै भी विभाग के चक्कर लगावत हैं। अपर न्याय सहायक निशा बानो का कहना है कि मुआवजा खातिर अनीशा के फाइल 21 सितम्बर 2017 का मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दीन गें है जबै रुपिया पास होई तबै  दीन जई।
अनीशा के बहिनी रमजानो खान बताइस कि बैंक मा चार दिना रुपिया निकालें खातिर बीमार अनीशा लाइन लगायें रहै पै रुपिया नहीं निकला जेहिके कारन बीमार अनीशा के मउत होइ गें मोरे लगें रुपिया होत तौ आपन बहिनी का बचा लेतिव।
अनीशा का मनसवा अख्तर खान का कहब है कि जउन रुपिया रहै वा खर्चा होइगा रहै यहै कारन अनीशा रोज बैंक के चक्कर लगावत रहै। बड़े मड़ई फोन कइके रुपिया निकाल लेंत रहै अउर गरीब लाइन लगावत लगावत मर जात रहै यहै कारन अनीशा के जान गें है।
बाईलाइन-गीता देवी

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Published on Nov 14, 2017