नेत्रहीन लड़कियाँ चला रही कंपनी

दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में एक यात्राओं का इंतज़ाम कराने वाली कम्पनी है जिसका नाम है खास। खास नाम इसलिए क्योंकि ये वाकई खास काम कर रहे हैं। इस कम्पनी के ऑफिस में काम करने वाली 5 लड़कियां कमलेश, अर्चना, दिप्ती और प्रेमा, दृष्टिहीन हैं और सफर बुक करने से लेकर लोगों से मिलने का सारा काम ये लड़कियां ही करती हैं।

खास में काम करने वाली कमलेश हरियाणा की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली कॉलेज में पढ़ाई की और  फिर कंप्यूटर कोर्स किया जिसके बाद वे खास से जुड़ गयीं। दिप्ती ने अपनी पढ़ाई त्रिपुरा से करी और प्रेमा उत्तराखंड से हैं। वहीं अर्चना गोरखपुर की रहने वाली हैं  

“खास” के बारे में पूछने पर कम्पनी के निर्माता आकाश कहते हैं, “हम दुनिया की पहली ऐसी ट्रैवल एजेंसी चला रहे हैं जो आँखों से दिखाई न देने वाली लड़कियों के साथ काम कर रहे हैं। ये लड़कियां वो सारा काम करती हैं जो हम और आप कर सकते हैं। इसलिए मैंने सोचा क्यों ना इस खास काम का नाम भी खास दिया जाए।”

इसका विचार आकाश को तब आया जब उन्होंने एक बार एक ऐसिड हमले उत्तरजीवी को सड़क पर गुब्बारे बेचते हुए देखा। आकाश ने उससे बात करी थी तो उस लड़की ने अपनी आप-बीती  बताई, 2 साल पहले एक लड़के ने मेरे चेहरे पर तेज़ाब डाल दिया था, उस चक्कर में मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया। मैं मॉल में काम करती थी और मेरी सैलरी 28 हज़ार रुपये थी। मेरे चेहरे की वजह से मुझे वहां से भी निकाल दिया।’ ये कहानी सुनने के बाद आकाश ने ठान लिया कि “मैं एक ऐसी जगह बनाऊंगा जहां चेहरा या शारीरिक कौशल के आधार पर नहीं बल्कि गुण देख कर लोगों को काम दिया जाएगा। बस खास यहीं से शुरू हुआ।”

फोटो और लेख साभार: यूथ की आवाज़