नेता या अपराधी ?

(फोटो साभार: विकिपीडिया)
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नई दिल्ली। राजनेताओं पर नज़र रखने वाली दिल्ली स्थित गैर सरकारी संस्था एसोसिएषन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के अनुसार भारत में लगभग पांच हज़ार नेताओं में से एक तिहाई नेताओं पर अपराधिक मामले दर्ज हैं। हाल में आई इस संस्था की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेष इस मामले में सबसे आगे है।
यू.पी. के अट्ठावन में से उन्तीस मंत्रियों पर कोई न कोई मुकदमा चल रहा है। मनोज कुमार पारस उत्तर प्रदेष सरकार में स्टैंप ड्यूटी के मंत्री हैं। जिला बिजनौर के नगीना क्षेत्र से चुने गए समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार पारस पर सामूहिक बलात्कार का आरोप है। छह सालों से यह मुकदमा जारी है। यू.पी. के ही परिवहन मंत्री महबूब अली पर भी एक साल से अपने राजनीतिक विरोधी की हत्या का मामला चल रहा है।
दोनों ही मंत्रियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत ठहराया है। उनका कहना है कि अदालत का फैसला आने पर वो निर्दोष साबित होंगे। कानून के अनुसार जब तक किसी नेता के खिलाफ अदालत फैसला नहीं सुनाती तब तक वो अपने पद पर रह सकते हैं।

यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में दिल्ली में हुए बलात्कार के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट में आरोपी मंत्रियों को इस्तीफा देने की सलाह दी गई थी। लेकिन सरकार द्वारा लाए गए नियमों में इसे नहीं माना गया है।