नाम जैसा काम करता वाराणसी जिले का फूलपुर गांव

वाराणसी जिले के फूलपुर गांव हो रही है खेती फूल की। आलू की खेती करने के बाद खाली पड़े खेत में सूरजमुखी के बीज बो देते हैं। ये खेती फरवरी के महीना में बोई जाती है और मई में तैयार हो जाती है। फिर सूरजमुखी के बीजों का तेल निकलवाते हैं। इन खूबसूरत फूलों की खासियत भी जान लीजिये। सूरज की दिशा में ये फूल अपनी दिशा बदलते हैं।

किसान उर्मिला ने बताया कि दो महीना में तैयार हो जाता है। फिर फूल को काटकर सुखाने रख देते हैं। सुखाने के बाद बीज निकाल लेते हैं। फिर मशीन में डालकर इन बीजों का तेल निकलवाते हैं और फिर घर के उपयोग में तेल को लेते है। किसान आंचल का कहना है कि लगभग 10 किलो में पांच किलो तेल निकलता है। किसान सुमतिया ने बताया कि सूरजमुखी की खेती करने में कुछ नहीं लगता है, न तो खाद और न कोई कीटनाशक दवा, बस ये केवल पानी में हो जाती है। किसान कमल का कहना है कि हमें पांच छह साल हो गया ये खेती करते हुए।

प्रधान सीता ने बताया कि फरवरी में लगाते हैं और मार्च अप्रैल में बीज निकाल लेते हैं। रिफ़ाइन्ड के जैसी मुलायम पूड़ी होती है। आलू खोदने के बाद खर्पी से सूरजमुखी के बीजों को गाड़ देते हैं।

रिपोर्टर: नाजनी और अनामिका

Published on May 17, 2018