नाम के खातिर हवैं सौ नम्बर गाड़ी

देखै खातिर हवै गाड़ी मडइन का कउनो सुविधा नहीं आये

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने कार्यकाल मा उत्तरप्रदेश के कइयौ जिलन मा सौ नम्बर गाड़ी का उद्घाटन कइ के भेजिस रहै। जेहिमा चित्रकूट जिला मा पचीस गाड़ी सौ नम्बर के आई हवैं। सरकार का कहब रहै कि या गाड़ी जघा जघा पहुंचाई जइहैं जहां भी कउनौ घटना होइ। पै मार्च 2017 से वर्तमान मुख्यमंत्री योगी के आवै के बाद तौ सौ नम्बर गाड़ी कउनौ थाने के सउहें तौ कउनौ चाय के दुकान के सउहें ठाड़ रहत हवैं। सरकार जउन उद्देश्य से सौ नम्बर चलाइस रहै वहिकर पालन नहीं होत आय? चित्रकूट जिला मा हर रोज कउनौ समस्या अउर घटना होत रहत हवैं। मड़ई सौ नम्बर का फोन करत हवैं तौ पता चलत हवै फोन बंद हवै।फोन काहे बंद हवै यहिकर कारन कउनौ का पता नहीं आय ?
पहाड़ी ब्लाक के मड़ई बताइन 10 अप्रैल का गडोली गांव मा दुइ सौ चालीस घर जल के राख होइ गें मड़ई सौ नम्बर का पचासन बार फोन लगाइस पै कउनौ नहीं उठाइस अगर फोन उठ जात तौ शायद कुछ मड़इन के घर बच सकत रहैं। येहिसे तौ नीक हवैंकि सौ नम्बर का बंद कइ दीन जाये । यहिसे गरीबन का कुछ फायदा नहीं आय।
22 अप्रैल का रात आठ बजे मऊ ब्लाक के पहाड़पुरवा मा अरहरी के खेत मा आगी लाग गे गांव के मड़ई सौ नम्बर का फोन कइ के परेशान होइ गें जबै फोन नहीं उठा तौ उंई खबर लहरिया का फोन करिन। अउर आपन समस्या बताइन कि आगी फैइलत जात हवै तबै आगी बूझावै वाले विभाग का फोन कीन तब उंई आगी बूझै के बाद पहुंचत हवै। पै तब तक सब राख होइ चुका रहै। या मामला मा सौ नम्बर चलावै वालेन का कहब हवै कि यहिमा हमार कउनौ गलती नहीं आय हमका तौ लखनऊ से जबै आदेश अई तबहिंने हम घटना स्थल मा पहुंचब जबै हुंवा से फोन आवत हवै तौ हम तुरंतै पहुचै के कोशिश करित हन। सरकार के नियम का पालन तो हमका करै का हवै?
पर सोचै वाली बात या हवै कि फेर इ गाड़ी चलाई काहे गई हवै? का सरकार नाम खातिर या सब करिस हवै? या मड़इन के समस्या का हल करै खातिर? यहिके खातिर केहिकर जवाबदेही हवै? का जनता यहिनतान बर्बाद होत रहि हैं? या योगी सरकार यहिके खातिर कुछ करी?