नस्लभेदी हिंसा का शिकार एक और अश्वेत युवक

(फोटो साभार - अलजजीरा डाॅट काॅम)
(फोटो साभार – अलजजीरा डाॅट काॅम)

अमेरिकी पुलिस का नस्लभेदी रवैया एक बार फिर सामने आया है। पुलिस ने एक अश्वेत नाबालिग लड़के को सोलह गोली मारी। जब इसका वीडियो शिकागो शहर में सामने आया तो हिंसा भड़क गई। सरकार को मजबूरन आरोपी अफसर पर हत्या का मुकदमा चलाना पड़ा। यह हत्या अक्टूबर 2014 में हुई थी। मगर वीडियो हाल ही में सामने आया।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस अफसर जैसन वाॅन डाइक ने सत्रह साल के लाक्वाॅन मैक्डाॅनल्ड नाम के एक अश्वेत लड़के पर सोलह गोलियां चलाईं। वीडियो में देखा जा सकता है कि मैक्डाॅनल्ड गली के बीचोबीच पुलिस की गाड़ी की तरफ दौड़ रहा है। तभी उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलती हैं। वह ज़मीन पर गिर जाता है। अपना हाथ उठाता है। लेकिन फिर उस पर आखिरी गोली चलती है। सड़क पर वह काफी देर तक यूंही पड़ा रहा। लेकिन कोई पुलिसवाला वहां नहीं आया। आखिरकार उसकी मौत हो जाती है।
शिकागो में लोगों ने इस घटना का विरोध किया। पत्थरबाज़ी और नारेबाज़ी भी हुई। कुछ वाहन भी तोड़े गए।

तीन सौ पैंसठ दिनों में तीन सौ चैदह हत्याएं
9 अगस्त, 2014 में अमेरिका के फर्ग्यूसन शहर में माइकल ब्राउन नाम के एक निहत्थे लड़के की हत्या पुलिस ने कर दी थी। तब से लेकर अगस्त 2015 तक तीन सौ चैदह अश्वेत लोगों की हत्या हो चुकी है। एसीएलयू क्रिमिनल लॉ रिफाॅर्म प्रोजेक्ट के डायरेक्टर इजेकील एडवर्ड ने अपने प्रोजेक्ट के तहत इकट्ठे किए आंकड़ों के ज़रिए नस्लीय भेदभाव की एक तस्वीर पेश की। पुलिस हिंसा का शिकार लोगों के आंकड़े जुटाकर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट के अनुसार श्वेतों के मुकाबले तीन गुना ज़्यादा अश्वेत पुलिस हिंसा का शिकार हुए। इनमें से एक तिहाई मरने वाले अश्वेत निहत्थे थे।

अमेरिका में नस्लभेद का इतिहास है पुराना

अमेरिका के फर्ग्यूसन शहर में जब अश्वेत लड़के माइकल ब्राउन को गोली मारी गई थी। तो इसका विरोध खूब हुआ। माइकल निहत्था था। उसपर चोरी करने का आरोप लगाकर पुलिस ने उसकी हत्या कर दी। मगर यह पहला मामला नहीं था। इस तरह की नस्लभेदी हिंसा एक सौ अड़तिस सालों से चल रही है। इसका सबसे पहली बार एकजुट होकर विरोध 1955 में हुआ था। जब एक बस में एक अश्वेत महिला रोज़ा लुईस मैकाले पाक्स ने काले लोगों के लिए आरक्षित सीट पर एक अंग्रेज़ महिला को बैठाने से मना कर दिया। इस पर रोज़ा को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसका विरोध खुलकर किया गया। मानव अधिकारों के लिए लड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ने इस तरह के बर्ताव पर सवाल उठाए। 1965 में पहली बार अश्वेत लोगों को वोट का अधिकार मिला। अमेरिका में गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले करीब साढ़े चार करोड़ लोग हैं। इनमें से अस्सी प्रतिशत अश्वेत लोग ही हैं। अमेरिकी जेलों में बंद कैदियों में से पैंतालिस प्रतिशत अश्वेत हैं।