नदी और भूमि संरक्षण के लिए गायक टी एम कृष्णा ने कदम उठाया

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

चेन्नई के मशहूर कर्नाटक संगीत के गायक टी एम कृष्णा जिनको वर्श 2016 में प्रतिष्ठित रेमन मैगसायसाय पुरस्कार दिया गया था, सामाजिक क्षेत्र के कार्य से जुड़ गयें हैं। कृष्णा 2016 के एक चर्चित गीत, जो क्रिके नदी और भूमि के संरक्षण के लिए लिखा गया था उसे इस साल 2017 में एक बार फिर अपने संगीत द्वारा लोगों के सामने लाये हैं। इसका कारण है चैन्नई में 2015 में आई बाढ़ में हुए नुकसान के बारे में लोगों को जागृत करना और ऐसा आगे भविष्य में न हो इसके लिए प्रयास करना।

कृष्णा का कहना है कि संगीत ने उनकी कलात्मकता को आकार दिया लेकिन उन्होंने इस कला का सामाजिक आधार के साथ क्या रिश्ता हो सकता है, इसपर सवाल खड़े किए और उनको सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने देखा कि उनकी कला पर एक जाति विशेष का वर्चस्व है और यह कला भारत की सांस्कृतिक विरासत के एक अहम हिस्से में भागीदारी से निचले वर्गों को प्रभावशाली तरीके से बाहर करके अन्यायपूर्ण व्यवस्था को बढ़ावा देती है।

कृष्णा 2011 से 2013 के बीच अपने जुनून एवं कलात्मकता को युद्ध पीड़ित उत्तरी श्रीलंका में लेकर गए। वह पिछले तीन दशकों में इस क्षेत्र में जाने वाले पहले कर्नाटक संगीतज्ञ हैं और उन्होंने उस देश में ‘‘सांस्कृतिक पुनरद्धार’’ को प्रोत्साहित करने के लिए उत्सव आयोजित किए। जिससे लोगों को अपनी विरासत और संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलता है।