नइयो लगदा दिल विडियो कॉल के बिना

मैं रुपाली झांसी में रहती हूं। मेरा एक दोस्त है राघव जो ओरछा में रहता है। राघव से मेरी पहली मुलाकत तब हुई जब मैं अपनी चाची के घर गई थी और राघव के घर में पार्टी थी। वो पूरी पार्टी में मुझे ही देखता रहा। कुछ दिनों बाद उसनें मुझे फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। मैंने उसे फेसबुक दोस्त बना लिया और हम दोनों की बातें होने लगी। एक दिन उसने मेरा फोन नम्बर मांगा और रात में 10 बजे फोन किया। उस दिन हमनें रात के 1 बजे तक बातें की। इस तरह हम रोज रात में बातें करने लगे। हम दोनों एक-दूसरे की पसंद-नापसंद को जानने लग गए। एक दिन उसने मुझे अचानक कहा कि मुझे अब तुमसें मिलना है। मैंने मनाकर दिया। लेकिन उसके उसने बहुत जिद की तो मैंने हां बोल दिया। मैंने कहा कि हम ओरछा रेलवे स्टेशन पर 10 मिनट के लिए मिलेंगे बस।
अगले दिन मैं 6 बजे स्टेशन पर गई तो वो वहां खड़ा था। हमनें जब एक-दूसरे को देखा तो हम बहुत जोर से हंसे। उसके बाद उसने मुझसे बोला कि क्या हम एक सेल्फी ले सकते हैं। मैंने हामी भर दी। जब हम सेल्फी ले ही रहे थे तभी अचानक से उसके दादाजी ट्रेंन से उतरे। हम दोनों के चेहरे देखने लायक थे और दादाजी भी समझ गये थे। धीरे-धीरे हम इस ही तरह रोज एक दूसरे से मिलने और बातें करने के बहाने खोजने लगे।
एक दिन में रात में व्हाट्स एप्प पर उससे बात कर रही थी और दीदी ने देख लिया। उसने मुझसे पूछा कि मैं किससे बात कर रही हूं। मैंने नहीं बताया। पर कहते हैं न कि ‘इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपता’, दीदी को हमारे प्यार का पता चल गया। दीदी ने मुझे उससे बात नहीं करने को कहा। कुछ दिन बीतने के बाद मैंने उसे फोन किया। मेरे हैलो बोलने पर वो मुझे पहचान गया। उस दिन के बाद हम फिर से बाते करने लगे हैं। मैंने अपनी बहन की शादी में उसे बुलाया तो वो आया और तब हमने हमनें सेल्फी ली। आज हम दोनों वीडियो कॉल पर बातें करते हैं और रोज एक-दूसरे का चेहरा देखे बिना नहीं सोते।