धर्म बदलने पर राजनीति

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में सत्तावन मुस्लिम परिवारों के हिंदू बनने का मामला गंभीर हो गया है। धर्म से जुड़ा होने के कारण इस मामले ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। 8 दिसंबर को धर्म बदलने के बाद 10 दिसंबर को इन सारे परिवारों ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई कि लालच देकर ज़बरदस्ती उन्हें धर्म बदलने के लिए तैयार किया गया था। हिंदूवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहयोगी संगठन धर्म जागरण मंच ने आगरा में घर वापसी नाम से धर्म परिवर्तन के एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। हालांकि उस वक्त इन परिवारों ने मीडिया को अपना बयान दिया था कि वह लोग अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहते हैं। लेकिन अब वही लोग कह रहे हैं कि हमारे साथ धोखा किया गया, दबाव डाला गया है।

मुज़फ्फरनगर में भी तनाव
जिले के चापर गांव की एक मुस्लिम महिला द्वारा एक हिंदू से शादी करने के मामले को लेकर यहां पर तनाव है। महिला ने 3 दिसंबर को शादी की थी। पति पत्नी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दोनों की जान को खतरा होने की अजऱ्ी दाखिल कर सुरक्षा मांगी है।

10 दिसंबर को मानव अधिकार दिवस के अवसर पर दिल्ली के समाजसेवी, अध्यापक और कलाकार वुमेंस प्रेस क्लब में सांप्रदायिक हिंसा की स्थिति पर चर्चा के लिए इकट्ठे हुए। सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर एक रिपोर्ट रिलीस हुई और नागरिक एकता मंच को सक्रिय करने की घोषणा हुई। दिल्ली विश्वविध्यालय के अपूवार्नंद ने कहा दिल्ली में कई बार हिंसा की स्थितियों में अलग समुदाय के लोगों ने जुड़कर काम किया है। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नागरिक एकता मंच बना था। पिछले कई महीनों से दिल्ली में अलग अलग जगहों में हिंसा हुई है। ऐसे में फिर से नागरिक एकता मंच के तहत इकट्ठा होने की जरूरत है। यहां मौजूद सईदा हमीद और हर्ष मंदर ने भी अल्पसंख्यकों के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। नारीवादी प्रकाशक उर्वशी बुटालिआ ने कहा कि साम्प्रादायिक हिंसा की घटनाओं का दस्तावेज़ बनाना ज़रूरी है।