देविका वैद्य, इनका रवैय्या ही इनकी शक्ति है

साभार: विसडेन इंडिया
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भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह यादगार क्षण था जब 19 साल की हरफनमौला खिलाड़ी देविका वैद्य बड़ी ही तसल्ली के साथ मैदान में उतरीं थीं।
वेस्ट इंडीज की तेज़ गेंदबाज शकीरा सेलमन ने तीसरे वनडे में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ इंटरनेशनल में अपने अंतिम पारी के लिए आयीं। उनके पहले छह ओवर, नयी गेंद होने के कारण केवल पांच रन ही दे पाए। जब 47वां ओवर आया तब उनके कप्तान ने देविका को जगह देने के लिए तीसरे अम्पायर को कहा ताकि वह वेदा कृष्णामूर्ति को 200 बनाने के लिए मदद करे।
देविका सब देख रही थीं और योजना बना रही थीं। वह जानती थी कि उनके विरोधी मैदान पर बहुत तेज़ हैं लेकिन फिर भी उन्हें मैदान पर कुछ सम्भावनाएं नजर आई और उन्होंने अगली गेंद को हवा में तेज़ उछालते हुए चौका दे मारा।
देविका को सर्वश्रेष्ठ जूनियर महिला खिलाड़ी का अवार्ड भी मिल चूका है।
देविका ने 2014 के दौरे के दौरान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महिलाओं को ट्वेंटी -20 अंतरराष्ट्रीय में तीन ओवर में 30 रन दे कर महिला क्रिकट को सराहनीय बनाया है।
हालाँकि सभी उनके लिए एक दम नये और उनसे अधिक अनुभवी थे। झूलन गोस्वामी और मिताली राज जैसे दिग्गजों के साथ एक टीम में खेलना बड़ी बात थी। देविका विनम्र, दोस्ताना लहजे वाली और बातूनी हैं। उन्हें अभिनेता रणबीर कपूर पसंद हैं और इसके अलावा उन्हें फोटोस लेने का भी शौक है और गिटार बजाना पसंद है।
वेस्ट इंडीज श्रृंखला के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी। कुछ साल पुराने राष्ट्रीय शिविरों के अनुभव, वरिष्ठ मित्रों और घरेलू रूप से मिले सहयोग और विश्वास ने उन्हें इसमें सफलता भी दिलाई।
जब उन्हें तीसरे मैच को खेलने का मौका मिला तब बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के बाद भी उन्होंने 45 गेंद में 32 नाबाद बल्लेबाजी करते हुए सभी को रोमांचित कर दिया।
देविका कहती हैं, “मैंने इसकी तैयारी की थी। घरेलू सत्र के दौरान, मैं जानबूझ देरी से खेलने के कहती थी क्योंकि मैं जानती थी कि जब भारत के लिए खेलूंगी तब मेरा नंबर 5वें या 6वें पर होगा। इसलिए यह मेरी पूर्व तैयारी थी और यह कोई नया नहीं है।”
देविका जानती हैं कि कैसें उन्होंने घरेलू मैदान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छलांग लगायी है। इसलिए वह अपने कौशल और मानसिक रूप से तैयारी कर लेती हैं और हमेशा की तरह वह पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से अपना खेल खेलती हैं। वह कहती हैं, “और अधिक खेल खेलने के लिए मुझे खुद में ही यह भावना विकसित करनी होगी और यह मुझे खुद से ही सीखना होगा।”

साभार: विसडेन इंडिया