देखें 2017 खबर लहरिया की नज़र से

दिसंबर का आखिरी हफ्ता नये साल के स्वागत की योजनाओं में बीत जाता है, इस समय हम सब नये साल के आने की खुशी के साथ अलविदा कहने वाले साल का मूल्यांकन भी कहते हैं कि ये साल हमें क्या देकर गया। हम भी 2017 की उपलब्धियों की यहां बात करते हैं कि इस गुजारते साल में हमारी किन खबरों को दर्शकों ने खास बनाया।

  • ढोलक बजते हुए तो बहुत देखे होंगे, चलिए आज देखते हैं ढोलक बनता कैसे है
    ढोलक बनने के सफर की कहानी बताने वाले इस वीडियो को 800,828 दर्शकों ने देखा। बाराबंकी के ये ढोलक बनाने वाले कारीगर ढोलक बनने का पूरा सफर इस वीडियो में बताते हैं। आम, कटहल की लकड़ी से तैयार इन ढोलकों को बाजार में आप 500 रुपये से लेकर 300 रुपये तक खरीद सकते हैं।
  • चिड़िया नहीं, लड़का है! सुनिए और देखिये बाराबंकी जिले का अजूबा, सोनू!
    पक्षियों की आवाज निकालने वाले सोनू को 213,969 लोगों ने देखा। सोनू बाराबंकी जिले के कोलवा गांव में रहते हैं। सोनू नाटक-नौटंकी में तरह-तरह की आवाजें निकालते हैं। सोनू बचपन से ही मिर्गी रोग से ग्रस्त हैं, इसके बावजूद भी उनके हुनर में कोई कमी नहीं है।
  • चित्रकूट में खौफनाक ददुआ की खूनी विरासत
    ये वीडियो 183,485 की संख्या में देखा गया। आप ददुआ के आंतक और देवता होने की कहानी इस वीडियो से जान सकते हैं। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के पुलिस थानों में ददुआ के खिलाफ 200 डकैती, अपहरण के साथ 150 कत्ल के केस लिखे हैं। तीस साल तक इस डकैत ने पाठा क्षेत्र में राज किया। ददुआ अपनी मुखबिरी रोकने के लिए मुखबिर को ऐसी सजा देता था कि कोई भी ये काम करने की हिम्मत दुबारा न करे। आंखे चाकू से निकाल देना, एक परिवार के दो सदस्यों को शंक के आधार पर परिवार वालों के सामने मार देना जैसी आंतक की कहानी ददुआ की है। वहीं फतेहपुर के नरसिंहपुर कबराहा गांव में ददुआ का मंदिर भी बन हुआ है।
  • मिलिए चित्रकूट ज़िले के बदौसा गाँव के रहने वाले सुमिरन श्याम से, जो नेत्रहीन हैं पर हैं दमदार कलाकार
    सुमिरन श्याम की ढोलक की थाप को 172,082 लोगों ने देखा। 14 साल के सुमिरन श्याम ट्रेनों और प्रोग्रामों में ढोलक बजाते हुए गाते हैं। उसकी आवाज और ढोलक की ताल आप सुनेंगे तो आप भी हैरान हो जाएंगे। ये पेशा  क्यों चुना पूछे जाने पर सुमिरन कहते हैं कि वह सूरदास हैं इसलिए ये काम करते हैं।
  • बाँदा जिले के बरेठी कला गाँव में स्वच्छ भारत की पहचान कुछ ऐसी, लोगों का आरोप, नहीं है शौचालय
    स्वच्छता अभियान का सच बताने वाले इस वीडियो को 105,627 लोगों ने देखा है। बांदा जिले के तिंदवारी ब्लाक के बरेठी कला गांव को स्वच्छ भारत अभियान के तहत 6 महीने पहले ले लिया था, पर गांव के लोग को 6 महीने बाद भी खुले में शौच से मुक्ति नहीं मिली।
    ये थी खबर लहरिया की सबसे ज्यादा पंसद की जाने वाली वीडियो। हम आशा करते हैं कि आप 2018 में भी हमारी खबरों को ऐसे ही पसंद करेंगे, नववर्ष की शुभकामनाएं !