देखी है बहलोल की मस्ती, नहीं तो देखिये महोबा की विडियो

आज तो मनोरंजन के अपार संसाधन हैं, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। रोजमर्रा के काम से लोग मनोरंजन के लिए समय निकालते थे। त्यौहारों और शादी ब्याह में शादी की भाग दौड़ में मंगलगीत और रात में जागकर महिलाओं के लिए इस थकान को कम करने का साधन ही था। समय बदला और गाने बजाने के लिए म्यूजिक सिस्टम और डीजे आया, लेकिन ये पहले से चले आ रहे रिवाजों को रोक नहीं पाया। ऐसा ही एक बुन्देली रिवाज है बहलोल शादी के माहौल में खेले जाने वाला बहलोल बारात के जाने के बाद खेला जाता है, तो दिखाते हैं आपको महिलाओं का खुलकर मनमर्जी करने वाला और गाली देती हैं। खेल बहलोल पुरुषों के भेष में हो जाती हैं पिटाई पुरुषों की ही और आज की नई पीढ़ी के नौजवान औरतों की इस मौज मस्ती को अश्लीलता समझकर करने से रोकते हैं। जिसके कारण से औरतों की मनमर्जी करने वाला बहलोल का रिवाज बुन्देली कस्बा और शहरों में अब खत्म ही हो गया है।

नत्थू ने बताया कि दौड़- दौड़कर बेलना मरती हैं। पुरुष बचने का बहुत प्रयास करते हैं, लेकिन इनके बेलन की मार से बच नहीं पाते हैं। ये शादी में बहलोल के समय इस मार में हम भी पड़ चुके हैं। मुल्ली का कहना है कि ऐसे उलटे सीधे गाना गाने में लोगों से नजरे मिलाने में बहुत शर्म आती है। लोग सुनते देखते भी हैं। गांव की सभी महिलाएं मिलकर खाना बनाने से लेकर सजना सवरना तक बहलोल में करती हैं। देखने वालों से नेग दो नहीं, तो कोड़ा खाओ। अगर सड़क में किसी को रोक लिया तो वो चाहे एसडीएम,दरोगा,चाहे वो मुख्यमंत्री भले ही क्यों न हो उनसे भी नेग लेती फिर, उसके बाद जाने देती हैं। भेष बदलकर घर-घर घुसती हैं। महिलाएं के बहलोल में नहीं होता शर्म का पर्दा।

रिपोर्टर: श्यामकली

Published on May 29, 2018