दुनिया के ईसाईयों को मिले नए पोप

Pope_Francisवैटिकन, इटली। ईसाइयों के कैथोलिक गुट के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप का चुनाव इटली देश के वैटिकन शहर में 12 मार्च 2013 को हुआ। चर्च (ईसाइयों का धार्मिक स्थल) के 266वें धर्मगुरु के रूप में इस बार पोप फ्रांसिस को चुना गया। इससे पहले पोप बेनेडिक्ट ईसाईयों के धर्मगुरू थे।
12 मार्च की सुबह से पोप का चुनाव शुरू हुआ था। यह चुनाव बहुत मजेदार होता है। चर्च के ऊपर लगी चिमनी से निकलने वाला काला धुआं जब तक सफेद में नहीं बदल जाता है तब तक चुनाव की प्रक्रिया जारी रहती है। चर्च के कई पदाधिकारी मिलकर पोप को चुनते हैं। उसके बाद एक घंटी बजती है जिसका मतलब पोप ने अपना पद मंजूर कर लिया है। चर्च के सामने लाखों लोग खड़े रहते हैं।

पोप का पद

चर्च के सबसे बड़े गुरु को पोप कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस पद पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति ईसाईयों के भगवान ईसा मसीह का उत्तराधिकारी माना जाता है। कैथोलिक (ईसाई धर्म मानने वाला एक गुट) देशों में राजनीति में पोप का बहुत दखल होता है। यहां तक कि कानूनों के पीछे भी पोप का धार्मिक नज़रिया झलकता है। दुनियाभर में कैथोलिक धर्म को मानने वाले डेढ़ सौ करोड़ लोग हैं।