दिन बदले मगर दिल नहीं

(फोटो साभार - इंडियन एक्सप्रेस)
(फोटो साभार – इंडियन एक्सप्रेस)

ब्रजराज क्षत्रिय बीरबर चमूपति सिंह महापात्र, ब्रिटिश राज के आखिरी राजकुमार का निधन चैरान्वे वर्ष की उम्र में 30 नवंबर को हो गया। अपनी जवानी के दिनों में ब्रजराज महापात्र अक्सर शिकार पर जाया करते थे और उड़ीसा के घने जंगलों में शेर चीतों का शिकार करते थे। कुट्टक जि़ले के तिगिरिया के वो राजा थे। गाँव वाले बड़ी श्रद्धा से आज भी उन्हें सम्मान देने जाते थे। पिछले 28 सालों से शानोशौकत भरा महल छोड़ कर वे छोटी सी पहाड़ी में रहने लगे थे। इस झोपड़ी की छत बारिश में टपकती थी। कुछ प्लास्टिक की कुर्सियां थीं और एक बैटरी से चलने वाला पंखा। मंेहगी भारी शेरवानी, बड़ी बड़ी मालाओं की जगह आज वो साधारण कुर्ता और धोती पहनते थे। उनकी आँखे मोतिया से इतनी खराब हो चुकी थीं कि अपने सामने की चीज़ को वो देखते नहीं महसूस करते थे।
आज़ादी के बाद उनकी जि़ंदगी बहुत बदल गई थी। सियासत नए राष्ट्र में मिला दी। बदले में सरकार द्वारा जो हर महीने उन्हें मिलता था वो उनके ऐश्वर्य की जि़ंदगी के लिए बहुत कम था। 1975 में इंदिरा गांधी ने वो भी खत्म कर दिया। महल तो पन्द्रह साल पहले ही बिक गया था। इतना होने पर भी वो अपने बीते वक्त और वर्तमान से संतुष्ट थे। अगर वो दुखी होते तो इतना लम्बा जीवन कैसे जी पाते?