दिनप्रति दिन लड़की के संख्या कमले जाई छई

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गर्भ में बच्चा

जिला सीतामढ़ी के डुमरा प्रखण्ड में 15 जुलाई 2013 के पटना से एक्सनएड टीम आयल रहथिन। उ सब 19 जुलाई 2013 के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में ‘‘हिम्मत है जीने की-बिटिया बचाओ मानवता बचाओ’’ सम्मेलन कर रहल छथिन।
पटना से आयल टीम शोभा कुमारी, निर्माला कुमारी, प्रसांत कुमार कहलथिन कि दिन प्रति दिन भ्रूण हत्या बढ़ले जाई छई। जब कि भारत में हर साल एक सौ बीस लाख लड़की पैदा होई छई अउर ओई में दस लाख अपना जन्म से पहिले ही मर जाई छई। 2011 के जनगणना के आंकड़ा में महिला पुरूष लिंगनुपात के मामला में बहुत चिंता के बात हई। जब कि बिहार में जहां 2011 के जनगणना में लिंगानुपात एक हजार पर नौ सौ उन्नीस रहई। फिर 2011 में जनगणना में एक हजार पर नौ सौ सोलह भेलई त एई से आकड़ा लगा सकई छई कि लड़की के जनसंख्या कतेक कम होतई। बिहार के दरभंगा जिला में उन्चास गांव में एक हजार पर सात सौ लड़की है।
प्रत्येक दु लड़की में सें एगो कुपोषण के शिकार होई छई। आकड़ा के आधार पर छौ बच्चा में एगो बच्चा के हत्या सिर्फ लड़की होय के कारण होई छई। ज्यादातर पढ़ल-लिखल परिवार में कन्या भू्रण हत्या होई छई। कम पढ़ल या गरीब परविार में भी भ्रूण हत्या हो रहल हई। इ समस्या सब जाति धर्म में हई। अगर इ सब होइते  रहतई त आवेवाला दिन में देश में छौ लाख हर साल के दर से लड़की के कमी होते जतई अउर ओतना लोग त कुमारे रह जतई। तब त अउर समाज में औरत के साथ बलात्कार, छेड़खानी, हत्या जेइसन घटना दिन प्रति दिन बढ़वे करतई। जब कि एई पर रोक लगावे के लेल 1994 में अधिनियम बनलई। जे पुरे देश में जनवरी 1996 में लागू होलई। लेकिन कानून के तहत अभी तक कोई  कार्यवाही न हो पलई।