दवाई लिखाला बहरे के

 

aspatalजिला वाराणसी के सरकारी अस्पताल शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय। इहां के जिला अस्पताल में तो मरीजन के सब दवाई तो मिल जाला। लेकिन चर्म रोग के अधिकतर मरीजन के दवाई बहरे से लिखा जाला। गरीबन एही उम्मीद से आवलन कि सब दवाई मिल जाई लेकिन पर्चा लिखइले के बाद उ लोग दवाई खरीद ना पइतन।
इहां चर्मरोग के दवाई लेवे आयल विशेश्वरगंज के रहे वाली मुराली देवी के कहब हव कि हमरे माथे आउर सर में दाना होके कीड़ा पड़ गयल रहल। जब दवाई लेवे अइली तो कुछ दवाई मिलल आउर बहरे से लिखा गयल। हम पर्चा लेके दुकान पे गये तो जरूर लेकिन खरीद ना पाये आउर वापस हो गये।
डेलवरिया के रहे वाली मीरा के लइका दीपक के पैर में चर्मरोग हो गयल रहल। मीरा के कहब हव कि कुछ तो दवाई मिलल। लेकिन अउरो बहरे से लिखायल हव। आउर हमनी एही खातिर सरकारी अस्पताल में आइला कि मुफ्त में दवाई मिली लेकिन एहिजो एतना पइसा लगअला कि का बताई।
बड़ौरा बाजार के रहे वाले धर्मराज के कहब हव कि हमके चर्म रोग हो गयल हव। हमके कुछ दवाई मिलल आउर पर्चा मिल गयल। डाक्टरन के इहो खासियत हव कि दवाई लिख के मेडिकल के नाम तो बतइबे करअलन कभी कभी मेडिकल के लगवो पहुंचवा देवेलन। एकरे बारे में सी.एम.ओ. एम.पी. चैरसिया के कहब हव कि दवाई तो मिले के चाही काहे नाही मिलत। ओन इ भी कहलन कि अगर डाक्टर बहरे के दवाई लिखत हउवन तो उ पर्चा ले जाके डा. ए.के. सिंह के देखावे के चाही।