दलितों पर बढ़ते अत्याचारों का कब होगा अंत?

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29 साल की चित्रलेखा देश की सबसे पहली दलित महिला ऑटो ड्राईवर है. 2005 में उन्होंने केरल में ऑटो लिया और अपना बिज़नस शुरू किया. लेकिन चित्रलेखा के इस साहसी कदम से कुछ लोग खुश नहीं थे. कुछ ऊँची जाति के लोगों का मानना था कि एक दलित महिला ऐसे कैसे ऑटो चला सकती है? ऑटो चलाने का काम पुरुषों का है और चित्रलेखा की इतनी हिम्मत!

उसी साल चित्रलेखा के ऑटो को आग लगा दी गयी. इसके बाद 2013 में, उनके ऑटो को तोड़ दिया गया. इस घटना के बाद जिले के डीएम ने चित्रलेखा को एक नया ऑटो दिया.

इस साल, मार्च के महीने में, एक बार फिर, चित्रलेखा के ऑटो को तोडा गया. चित्रलेखा का कहना है कि, “ऊँची जाति के पुरुषों ने मेरे घर को लूटा. मेरे आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे का अपमान किया, जिसके कारण उसे स्कूल छोड़ना पड़ा. आज वह बाईस साल का है लेकिन ना वो पढ़ पाया और ना जॉब पा सका.”

अब सवाल यह है कि आखिर क्यों चित्रलेखा को लगातार निशाना बनाया जा रहा था? क्या इसका कारण सिर्फ उसकी जाति से सम्बंधित है? अगर हम 2016 की ही बात करें तो दलितों के खिलाफ हुए अपराध की सूची लम्बी है. इसी साल उत्तराखंड के मंदिर में दलितों के प्रवेश करने पर रोक लगा दी गयी. देश के एक कोने में दलितों के घरों को जलाया और महिलाओं को मारा गया. यही नहीं, केरल की जीशा का बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गयी.

देखा जाये तो 2009 से लेकर 2014 तक दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. देश के लगभग तीस करोड़ दलित और आदिवासी आज भी जाति के नाम पर भेद-भाव और हिंसा का शिकार हो रहे हैं. इस साल भी राष्ट्रिय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का अनुमान है कि दलितों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है. हालात यह है कि जितनी तेज़ी से अपराध बढ़ रहे हैं उतनी ही तेज़ी से अपराधियों को पकड़ने में पुलिस नाकाम हो रही है.

2014 के आकड़ों के अनुसार

दलितों के खिलाफ होने वाले अपराध सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में होते है. यूपी में कुल 8,075 केस दर्ज किये गए थे.यूपी के बाद राजस्थान (8,028) और बिहार (7,893) है. आदिवासियों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध राजस्थान (3,952), मध्य प्रदेश (2,279) और ओडिशा (1,259) में हुए. 2014 में 2,233 यौन शोषण के केस दलितों द्वारा दर्ज कराए गये, जिनमें हत्या के मामले 704 हैं. वहीं आदिवासियों पर 925 बलात्कार के मामले और  157 हत्या के केस दर्ज हुए.

लेख साभार : हिमाद्री घोष, इंडिया स्पेंड