दलितों के घर भोज, राजनीति ज्यादा आपसी सद्‌भाव कम। देखें चित्रकूट की विडियो

दलित के घर खाना खाने जाना कभी राहुल गाँधी के चुनाव प्रचार का हिस्सा था. आज लगभग हर पार्टी के नेता ये करते दिखते हैं. पिछले दिनों यूपी के मंत्री सुरेश राणा भी अलीगढ़ के एक दलित के घर खाना खाने पहुंचे थे. लेकिन वहां उनके सामने परोसा गया हलवाई का बना खाना और मिनरल वाटर की बोतल, जैसे ही मामला लोगों की नजरों में आया मंत्री जी की कोशिश पर पानी फिर गया.

इस मामले पर खबर लहरिया ने चित्रकूट जिलें में रहने वाले दलितों से बात की.

सुखराम वर्मा ने बड़े ही रूखे ढंग से कहा कि ये गलत है. जब घर आये हो तो घर का खाना खाओ और जब बाहर का खाना ही खाना है तो घर ही क्यों आये, ये नाटक किस लिए. मतलब का प्रेम है नेताओं का.

इस बारे में राहुल कहते हैं कि ये सरासर गलत है, घर गये हो तो परिवार का ही खाना खाओ, ये तो यही बताता है कि वो लोग बड़े लोग है और ऐसे लोगों को दलितों से कोई खास लगाव नहीं होता, गलत है ये..

मंत्री सुरेश राणा के इस कृत्य को उनकी ही पार्टी की सदस्य और सांसद सावित्रीबाई फूले ने दिखावा और बहुजन का अपमान कहा तो वहीँ केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि “मैं भगवान राम नहीं हूँ जो दलितों के साथ खाना खाकर उन्हें पवित्र कर दूंगी.”

कुछ इससे भी आगे निकल गये और कहा कि मंत्री दलितों के घर जा रहे हैं और मच्छरों के काटने के बाद भी वहां रुक रहे हैं. इस मामले में कुछ पार्टी के नेता साथ आये तो कुछ ने खुद को दूर ही रखा.

बहुजन समाजवादी पार्टी की कार्यकर्त्ता मीरा ने कहा, नेताओं का यह व्यवहार साफ़ बताता है कि आज भी वो दलितों के साथ भेदभाव वाली भावना रखते हैं और छुआछूत को मानते हैं. यदि वो हमारे हाथ का खाते, पीते तो हम भी समझते ही इनके मन में भेदभाव नहीं रहा. लेकिन इन लोगों के व्यवहार ने बता दिया है कि जो ये लोग अभी कर रहे हैं वही बाद में करेंगे.

बीजेपी पार्टी के सदस्य मनोज पाण्डेय ने कहा कि ये सब खानापूर्ति है और कुछ नहीं. फिर वो कोई भी पार्टी हो सभी दिखावा कर रहे हैं.

वहीँ, मानिकपुर-मऊ के विधायक प्रतिनिधि, शक्ति सिंह का कहना है कि हमारे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है लेकिन हो सकता है कि डॉ की सलाह पर उन्होंने बाहर का खाना न खाया हो. कई बोल ऐसा करते हैं और अपना पानी साथ लेकर चलते हैं.

जबकि विधायक आर के पटेल ये सुन कर भड़क गये और बोले कि हमें किसी की चौपाल का नहीं पता हम सिर्फ अपना जानते हैं और उसी की बात करते हैं.

माना जाता है कि जाति-भेदभाव मिटाने के लिए हमेशा ‘रोटी-बेटी- सम्बन्ध’ पर जोर दिया जाता है, लेकिन हमारे नेता रोटी पर ही अटक गये हैं वो भी आधे तौर पर. एक ऐसा राज्य जहाँ देश-भर के एक चौथाई से ज्यादा दलित हिंसा के केस दर्ज होते आ रहे हैं.

रिपोर्टर: नाजनी

Published on May 4, 2018