तो क्या तीस लाख गए पानी में?

kshetryजि़ला वाराणसी। बनारस के लोग रोज़ाना जाम से जूझते हैं। सिग्नल है, यातायात पुलिस है मगर हर घंटे जाम लग जाता है। ऐसे में अगर तीस लाख की लागत से बना तीन सौ मीटर का स्टैंड खाली पड़ा रहे तो गुस्सा आएगा ही।
कचहरी स्थित जे.पी. मेहता स्कूल के सामने एक वाहन स्टैंड है। पूर्व डी.एम. प्रांजल यादव के समय करीब साल भर पहले यह बना था। फुटपाथ को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया गया था। तब सवाल उठा था कि फिर फुटपाथ पर खड़ी होने वाली गाडि़यां कहां जाएंगी? इस पर प्रशासन ने तीस लाख रुपए खर्च कर वाहन स्टैंड बनवाया। लेकिन न तो अतिक्रमण हटा और न ही इससे सरकार को मुनाफा हुआ। यहां से गुज़रने वाले अभिषेक, संजू, दीपक और कई लोगों ने बताया कि स्टैंड में ट्रक खड़े रहते हैं। फिर हम वहां अपनी गाडि़यां कैसे खडी करें? दरअसल यह स्टैंड ट्रक स्टैंड नहीं था यहां तो दोपहिया वाहन खड़े होने थे। इतना ही नहीं यहां तो कुछ खानाबदोश लोगों ने आकर अपना ठिकाना बना लिया है। गाडि़यों की जि़म्मेदारी लेने के लिए भी यहां कोई तैनात नहीं है।
वी.डी.ए. के सहायक अभियंता का कहना है कि निर्माण कराकर यह स्टैंड नगर निगम को सौंप दिया गया था। लेकिन अभी उनकी ओर से कोई पहल नहीं की गई है। नगर निगम के नगर आयुक्त बी.के. द्विवेदी का कहना है कि जि़ला प्रशासन को इस स्टैंड के लिए पहल करनी है। तभी स्टैंड का ठेका किसी को दिया जा सकेगा।