तेरा मिलना और फिर बिछड़ जाना बहुत तकलीफ देता है !

प्रेम में मिल जाना ही मंजिल नहीं होती, कभी-कभी बिछड़ कर भी प्रेम को अमर किया जाता है. सुनिए इस बार गुड़िया की कहानी, जिसने प्रेम पाया और फिर उसमें जी कर, खो कर, उसे अपनी मंजिल बना लिया. फतेपुर की गुड़िया जिसने समाज से परे प्रेम विवाह किया और फिर जुदाई भी देखी…