ढोल और बहलोल से लेकर बफर और डीजे तक का सफ़र, देखिये बुंदेली शादी के बदलते रूप

जब हर तरफ बदलाव नजर आ रहा है तो शादियों की रस्मों-रिवाजों में बदलाव होना भी सामान्य बात है। शादियों को हमारी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ा जाता रहा है। वहीँ इस आधुनिक समाज में शादियों के बदलते रूप देखना बेहद अनोखा हैं।

आजकल बुंदेलखंड में शादियों का मौसम है और वहां भी समय के साथ होते परिवर्तन को आसानी से देखा जा सकता है। लेडिज संगीत, मेंहंदी पार्टी, ब्यूटी पार्लर, डीजे, वीडियोग्राफी, फोटो-सेशन, खाने का बुफे सिस्टम, महंगे होटल और गाड़ियाँ आदि सुविधाओं का जम कर बोल-बाला होने लगा है। बस आपको पैसा खर्च करना है और हर सुविधा आपके पास मौजूद होती जाती है।

गांव तिंदवारी, बाँदा के रामस्वरूप बताते हैं कि पहले बारात हाथी, घोड़ा, रथ, पालकी के बिना संभव नहीं होती थी लेकिन आज डीजे ने इन सबकी जगह ले ली है।

गांव मवई, बाँदा के निवासी गोरेलाल बताते हैं कि पहले सिर्फ एक धोती में ब्याह हो जाया करता था। न सिर्फ लड़का बल्कि लड़की भी एक जोड़ी कपड़े में ही विदा हो जाया करती थी लेकिन अब हर रस्म के लिए अलग से कपड़े और जेवर हैं। यूँ कहें कि जिसके पास जितना पैसा, उसके पास उतनी महंगी रस्मों-रिवाज।

सिर्फ यही नहीं जहाँ पहले बारात हफ्ते या दस दिन तक रुका करती थी वहीँ अब बारात 24 घंटे भी मुश्किल से रूकती है। खाने-खिलाने का चलन भी बदल गया है। लोग बैठ कर पत्तर पर नहीं बल्कि खड़े हो कर बुफे सिस्टम में खाना पसंद करते हैं। हालाँकि इसका अपना फायदा भी है कि इससे खाने की बर्बादी नहीं होती, जो जितना खाना चाहता है उतना ही अपनी प्लेट में ले लेता है।

अब जब बुफे सिस्टम है तो कई तरह के पकवान भी रखे जाते हैं। पहले चने की रोटी और साग होता था जिसे बारात बड़े ही चाव से खाती थी। पहले लोग मिठाई के शौकीन नहीं थे। दही में बूरा डाल कर खाना ही मिठाई का काम कर दिया करता था लेकिन आज कई तरह की वैराइटी देखने को मिल जाती है।

सिर्फ यही नहीं, शादी की ख़ुशी में नाच-गाना भी बहुत बदल गया है। पहले महिलाएं नाच-गाने का मुख्य आकर्षण हुआ करती थी। गांव भर घूम-घूम कर ढोल की थाप पर नाचती थीं। बारात जाने के बाद महिलाओं का खास भूत नाच हुआ करता था लेकिन आज महिलाएं नाच-गाने से दूर हो गयी हैं। अब पुरुषों ने डीजे के साथ यहाँ भी अपनी जगह बना ली है। अब जवान लड़के और बच्चे डीजे की धुन पर थिरकते हुए देर रात तक नाचते रहते हैं।

दूसरी तरफ, अब फैशन सिर्फ लड़कियों के लिए ही नहीं बल्कि लड़कों के लिए कई बदलाव लाया है। शादी में जहाँ लड़कियाँ और महिलाएं ब्यूटी पार्लर जाती थी अब वहीँ मंजर यह है कि दुल्हे से लेकर उसके सभी भाई और अन्य पुरुष भी ब्यूटी पार्लर जाते हैं। बालों को रंगीन करते हैं, आँखों में लेंस लगाते हैं, मसाज आदि भी करवाते है।
इन सब बदलाव की वजह हैं हमारा बदलता बाजार, पैसा और हमारी आधुनिक दिखने की चाह जिसमें मोबाइल फ़ोन ने अपना पूरा योगदान दिया है। हम आज शादी में जाने से पहले सेल्फी लेते हैं और पूरी शादी में हर रस्म के साथ फोटो ले कर उसे सोशल-मीडिया पर डालते हैं।
लेकिन फिर भी इतने बदलाव आने के बाद भी कुछ पुरानी रस्में हैं जो अभी भी निभाई जाती हैं, जैसे महिलाओं का पसंदीदा बहलोल। शादी के साथ-साथ उसके बाद की रस्मों में भी बड़ा बदलाव आया है। अब शादीशुदा जोड़ा सुहागरात के नाम से बिदकता नहीं है और ना ही लड़की शर्माती है। बल्कि दोनों ही किसी खास जगह पर जाने का प्लान बनाते हैं और उसके बारे में सभी को बताते भी है।
तो अबकी बार जब किसी गांव से शादी का न्यौता आये तो जायें जरुर। भले ही आपको पूड़ी बेलने को न मिले पर डीजे, पकवान और हंसी-ठिठोलियों का जम कर मज़ा उठाईयेगा।
रिपोर्ट- खबर लहरिया ब्यूरो

21/06/2017 को प्रकाशित