डर होइगा दूर, मिली हिम्मत

poster picजिला चित्रकूट, ब्लाक मानिकपुर, गांव खिचरी का बेलहा पुरवा। हिंया के सुन्दी नाम के मेहरिया के मनसवा देशराज का मरे बारह बरस होइगे। यहै से वा मानिकपुर सिंचाई विभाग मा चपरासी के पद मा नौकरी बहुतै हिम्मत से करत हवै।
हिंया के सुन्दी का कहब हवै कि शुरू मा नौकरी करै मा बहुतै डेर लागत रहै। काहे से कि कत्तौ घर से नहीं निकरत रहौं। पहिले देवर साथ मा आवत जात रहै, पै जबै से दूसर मेहरियन का आंगनवाड़ी अउर आशा बहू के नौकरी करत देखै हौं तबै से थोइ हिम्मत आई हवै अब अन्दर से डेर भी खतम भा हवै। आज खुशी से बिना डेर के नौकरी करत हौं। अपने बच्चन का पालत हौं।
यहिनतान हिम्मती मेहरिया के दूसर खबर मऊ के हवै। हिंया के श्रीदेवी का कहब हवै कि मोर शादी कौशाम्बी जिला, गांव कदैला मा महेन्द्र के साथै दस बरस पहिले भे रहै। मनसवा शुरू से दारू पी के मारत पीटत रहै। घर के खाना खर्चा खातिर एकौ रूपिया नहीं देत रहै। पांच छोट-छोट बच्चा हवैं। पांच बरस से अपने मइके मा रहत हौं। अपने से हिम्म्त कइके रामनगर ब्लाक के होटल मा काम करत हौं। रोज के एक सौ बीस रूपिया कमा लेत हौं। या कारन घर का खर्चा खुदै चलावत हौ। का फायदा दारू पियै वाले मनसवा के साथै रहिके। जउन कि रोजै मार पीट करै मेहरिया हिम्मत कइले तौ खुद कमा के खा सकत हवै।
यहिनतान हिम्मती मेहरिया के तीसर खबर जिला चित्रकूट, ब्लाक मानिकपुर, गांव ऐलहा के छिवलहा पुरवा के हवै। हिंया के संतोषिया कहिस कि शादी छह बरस पहिले हेला बगदरी गांव के गोरेलाल के साथै भे रहै। वहिका सांस के बीमारी हवै। वा मारकुण्डी चैराहा मा अण्डा के दुकान खोले रहै। या काम करै मा मनसवा का परेशानी आवत रहै। यहै से मैं खुदै अण्डा के दुकान मा चार बरस से बइठत हौं। शुरू मा दारू पियै वाले मड़ई आवत रहैं तौ डेर लागत रहै, पै अब कउनौ मड़इन से डेर नहीं लागत हवै। बहुतै हिम्मत से दुकान चलावत हौ अउर घर का खर्चा नींकतान से चलत हवै।