ट्रम्प का मुस्लिम विरोधी बयान

(फोटो साभार - विकीमीडिया)
(फोटो साभार – विकीमीडिया)

वाशिंगटन, अमेरिका। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी का उम्मीदवार बनने के दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में मुसलमानों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि ‘जब तक हमारे देश के प्रतिनिधि यह पता नहीं लगा लेते कि क्या चल रहा है, तब तक अमेरिका में मुसलमानों का प्रवेश पूरी तरह से रोक दिया जाए।’ ट्रंप के अनुसार, हाल में जारी सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी के एक सर्वेक्षण के अनुसार सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 25 प्रतिशत लोगों ने माना कि वैश्विक जिहाद के तौर पर अमेरिका में अमेरिकियों के खिलाफ हिंसा न्यायोचित है और 51 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि अमेरिका में मुसलमानों के पास शरीयत अनुसार शासित किए जाने का विकल्प होना चाहिए।
हालांकि ट्रंप के इस बयान को राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के अन्य दावेदारों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप महीनों से लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं। पहले उन्होंने अमेरिकी मतदाताओं को अप्रवासियों और खासकर मेक्सिको के अप्रवासियों के खिलाफ उकसाया। जब से इस्लामिक स्टेट का आतंकवाद सुर्खियों में आ रहा है ट्रंप मुसलमानों के खिलाफ आग उगल रहे हैं।
उनकी ताज़ा मांग कि मुसलमानों को अमेरिका में न घुसने दिया जाए, अमेरिकी संविधान और अंतरराष्ट्रीय कायदे कानून का हनन करती हंै। अपनी मांग के साथ ट्रंप ने समाज को जो नुकसान पहुंचाया है, वह गंभीर है। उन्होंने दुनिया के डेढ़ अरब मुसलमानों को संभावित आतंकवादी घोषित कर दिया है। यह नस्लवाद है और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के खिलाफ है।
डोनाल्ड ट्रंप की मांग सिर्फ शर्मनाक ही नहीं खतरनाक भी है। अपने विचार के साथ वे समाज के एक हिस्से में व्याप्त विदेशी विरोध और इस्लाम विरोधी माहौल को हवा दे रहे हैं और इस तरह इस्लामी कट्टरपंथियों को मज़बूत कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप लोगों को भड़काने वाले नेता हैं, जिनके पास इसके लिए ज़रूरी धन और चरमपंथी समर्थकों का दल भी है। वे अमेरिका के लंबे चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। समय आ गया है कि उन्हें गंभीरता से लिया जाए और उनके चेहरे पर चढ़ा नकाब उतार दिया जाए।